
इंदौर। जनता को स्वच्छ पानी पीने का अधिकार है , सरकार दूषित और विषाक्त पानी कब तक देगी ? आज भी 8 माह बीतने के बाद भी सरकार ओर स्थानीय प्रशासन मॉनिटरिंग नहीं कर पा रहे हैं। आज भी इंदौर की स्थिति यह है कि प्रमुख अस्पतालों में मलमूत्र मिश्रित बैक्टीरिया का पानी सप्लाई किया हो रहा है। शहर की जनता को स्वच्छ पानी कब मिलेगा ?
उक्त बात मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रेसवार्ता में कही है।
भागीरथपुरा दूषित पानी जांच आयोग रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं। न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार से जवाब मांगते हुए जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अब इंदौर में दूषित पानी से अस्पताल भी नहीं बचे , मल मूत्र के बैक्टीरिया ई कोलाई अस्पतालों के पानी में पाया गया है। क्या हर समस्या के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा ? न्यायिक जांच रिपोर्ट के बाद भी किसी को घटना का जवाबदार नहीं माना गया है, यह आश्चर्यजनक बात है।
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि संविधान की धारा 21 में आम जनता को स्वच्छ पीने पानी देना मौलिक अधिकारों में शामिल है। अफ्रीका के छोटे छोटे देश के समान इंदौर की हालत हो गई है, जहां शुद्ध पीने का पानी नहीं मिलता है।
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा किसी की भी जवाबदारी तय करना नहीं चाहती है। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में महापौर के पास 66 दिन फाइल अटकी रहना प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। कुल 859 दिन यानि 20 महीने फाइल अटकी रही। सिंघार ने भागीरथपुरा पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा देने मांग करते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट पर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस फिर जनहित में विधानसभा से लेकर सड़कों पर उतरेगी।
यह भी थे उपस्थित
पत्रकार वार्ता मे पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा एवं शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे, नीलाभ शुक्ला, कनुप्रिया सत्तन, अमित चौरसिया , आनंद कासलीवाल उपस्थित थे।
