
अनूपपुर। नगर पालिका परिषद अनूपपुर में भाजपा का अध्यक्ष-उपाध्यक्ष होने के बावजूद नगर पालिका के आधिकारिक ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का बैनर कांग्रेस नेताओं के स्वच्छता अभियान में नजर आने के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल स्वच्छता अभियान पर नहीं, बल्कि नगर पालिका की आधिकारिक प्रचार सामग्री के इस्तेमाल और उसकी निगरानी व्यवस्था पर है।
*आखिर बैनर कांग्रेस नेताओं तक पहुंचा कैसे?*
नगर पालिका के नाम और अभियान से संबंधित आधिकारिक बैनर यदि कांग्रेस नेताओं के कार्यक्रम में लगाया गया, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह बैनर किसने उपलब्ध कराया? क्या नगर पालिका प्रशासन की ओर से इसकी अनुमति दी गई थी या फिर आधिकारिक प्रचार सामग्री बिना अनुमति के कार्यक्रम स्थल तक पहुंची?
यदि अनुमति दी गई थी तो किस अधिकारी अथवा जिम्मेदार व्यक्ति ने अनुमति दी और यदि अनुमति नहीं थी तो नगर पालिका की सामग्री बाहर कैसे पहुंची—इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।
*भाजपा के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, फिर निगरानी किसकी?*
नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अनुजिलका शैलेंद्र सिंह और उपाध्यक्ष सोनालिका कमलेश तिवारी, दोनों भाजपा के पार्षद हैं। ऐसे में नगर पालिका की आधिकारिक प्रचार सामग्री के उपयोग को लेकर परिषद की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इनकी भूमिका कांग्रेस से क्या है यह जांच का विषय है
*वार्ड-2 पार्षद ने उठाई आपत्ति*
वार्ड क्रमांक-2 के पार्षद संजय चौधरी द्वारा मामले पर आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई है। उनका कहना है कि नगर पालिका की आधिकारिक प्रचार सामग्री का उपयोग किस अनुमति से किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।
भाजपा जिला संगठन की चुप्पी पर भी चर्चा
मामले के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि भाजपा जिला संगठन इस पूरे घटनाक्रम को किस नजरिए से देखता है? क्या जिला संगठन नगर पालिका से इस संबंध में जानकारी लेगा? क्या जिम्मेदारों से जवाब मांगा जाएगा? इन सवालों का जवाब भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
*जांच में सामने आ सकता है बैनर का पूरा सच*
अब जरूरत इस बात की है कि नगर पालिका प्रशासन स्पष्ट करे कि बैनर किसने बनवाया, किसके आदेश से जारी हुआ, किसे सौंपा गया और उसके राजनीतिक कार्यक्रम में इस्तेमाल की अनुमति किसने दी।
स्वच्छता अभियान जनहित का विषय है और इसमें किसी राजनीतिक दल का एकाधिकार नहीं हो सकता। लेकिन नगर पालिका की आधिकारिक सामग्री का उपयोग किस प्रक्रिया के तहत हुआ, यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना जरूरी है। बैनर की उपलब्धता से लेकर कार्यक्रम में उसके इस्तेमाल तक की जानकारी सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि मामला महज प्रशासनिक लापरवाही का है या प्रचार सामग्री के वितरण में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है।
