शिवपुरी: होलाष्टक 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेंगे। फाल्गुन शुक्ल सप्तमी युक्त अष्टमी से पूर्णिमा तक चलने वाले इन 8 दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, वाहन या मकान की खरीद-बिक्री, नया व्यवसाय और निर्माण जैसे सभी शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। इस समय को साधना, तप और परीक्षा का काल माना गया है।
आयुर्वेदाचार्य डॉ. शिवदत्त शर्मा ने बताया कि यह समय सर्दी के जाने और गर्मी के आने का है। इस मौसमी बदलाव में वातावरण में बैक्टीरिया और वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इसका आध्यात्मिक समाधान है। इस समय सूर्य की पराबैंगनी किरणें शरीर पर विपरीत प्रभाव डालती हैं। ऐसे में उपवास, जप और तप न केवल मानसिक शांति देते हैं, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। औषधीय धुआं घर और मोहल्ले के वातावरण से हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट कर प्राकृतिक सैनिटाइजेशन का कार्य करता है।
