
ओंकारेश्वर। मार्कण्डेय संन्यास आश्रम में ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी रामानंद सरस्वती महाराज के अष्टादश निर्माण महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 1 से 3 अक्टूबर तक चलने वाले महोत्सव में देशभर के संत-महात्मा शामिल हो रहे हैं और धर्म, कर्म, आत्मा और वर्ण व्यवस्था पर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
आश्रम के स्वामी प्रणवानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म और कर्म की श्रृंखला से गुजरता है, जबकि आत्मा न जन्म लेती है और न अंत होता है। मनुष्य को विवेक मिला है, जिससे वह अच्छे-बुरे का निर्णय करता है और कर्मानुसार फल मिलता है। महापुरुषों ने इस श्रृंखला से पार जाने का मार्ग बताया है।
महामंडलेश्वर स्वामी वीरागानंद गिरी महाराज ने कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का आधार गुण, कर्म और स्वभाव है। महोत्सव में बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु मौजूद रहे।
