सतना : नीट परीक्षा में सक्रिय सॉल्वर गिरोह के तार प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़ने के मामले में अब कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर कटघरे में आ गई है. बीते दिनों बिहार के लखीसराय में नीट पुनर्परीक्षा के दौरान दूसरे अभ्यर्थी की जगह सॉल्वर बनकर रंगे हाथों गिरफ्तार हुआ एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र हिमांशु कुमार पिछले 100 दिनों से अधिक समय से कॉलेज में अनुपस्थित है. इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन ने न तो इस छात्र की कोई खोजबीन की, न अनुशासन समिति की बैठक बुलाई और न ही उसके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या वैधानिक कार्रवाई की.
मेडिकल कॉलेज से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक छात्र हिमांशु कुमार ने 7 जून को घरेलू कारणों से घर जाने का हवाला देते हुए 22 जून तक की छुट्टी का औपचारिक आवेदन दिया था. इसी अवकाश की आड़ में वह 21 जून को बिहार के लखीसराय स्थित परीक्षा केंद्र जा पहुंचा जहां राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित नीट पुनर्परीक्षा में वह शुभम कुमार वर्मा नामक वास्तविक परीक्षार्थी की जगह सॉल्वर के रूप में परीक्षा हॉल में घुस गया. बायोमेट्रिक मिलान और सघन सत्यापन के दौरान जैसे ही यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ लखीसराय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे परीक्षा कक्ष से ही रंगे हाथों दबोच लिया था.
पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार हिमांशु कुमार मूल रूप से बिहार के सुपौल जिले के पथरा थाना अंतर्गत ग्राम जोल्हनिया का स्थाई निवासी है और उसके पिता का नाम शिवनारायण साह है. इसके ठीक उलट मेडिकल कॉलेज के प्रवेश रिकॉर्ड खंगालने पर चौंकाने वाला सच यह सामने आया कि उसने दाखिले के समय प्रदेश के भोपाल जिले की हुजूर तहसील अंतर्गत वार्ड नंबर 38, 80 फीट रोड का मूल निवास प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था.वही निर्धारित अवकाश की अंतिम तारीख 22 जून बीतने के बाद 100 दिन से भी अधिक का समय गुजर चुका है लेकिन हिमांशु कुमार की कोई जानकारी नहीं . केंद्र सरकार और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग यानी एनएमसी द्वारा मेडिकल छात्रों की उपस्थिति, बायोमेट्रिक ट्रैकिंग और अवकाश को लेकर बेहद कड़े कायदे-कानून तय किए गए हैं जिसके तहत बिना पूर्व अनुमति लंबी गैर-हाजिरी पर छात्र का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और कारण बताओ नोटिस जारी करने का स्पष्ट प्रावधान है. इतने स्पष्ट नियमों के बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने अब तक न तो अनुपस्थित छात्र के परिजनों से संपर्क साधा न उसके स्थानीय पते पर कोई नोटिस तामील कराया और न ही उसकी प्रवेश पात्रता रद्द करने के लिए चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को कोई पत्राचार किया.
इनका कहना
अभी मैं आया हूँ मुझे जानकारी नहीं है जो भी वैधानिक कार्यवाही होगी की जाएगी. छात्र मेडिकल कॉलेज नहीं आ रहा है.
डा. सुनील अग्रवाल
डीन मेडिकल कॉलेज सतना
