भोपाल: केरवा जलाशय की फुल टैंक लेवल, बफर एरिया और सीमा को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की भोपाल बेंच ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. 30 सितंबर को हुई सुनवाई में अधिकरण ने संबंधित समिति को तीन सप्ताह में एफटीएल और बफर एरिया का अंतिम निर्धारण करने को कहा है. इसके लिए संसाधन विभाग के उपलब्ध रिकॉर्ड, कंटूर और टोपोग्राफिकल मैप के साथ जलाशय की ऊंचाई को आधार बनाया जाएगा। एनजीटी ने ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और मौके पर जमीनी सत्यापन (ग्राउंड ट्रूथिंग) कराने के भी निर्देश दिए हैं. इसकी विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश की जाएगी.
अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी. पूर्व रिकॉर्ड के अनुसार केरवा जलाशय का जलमग्न क्षेत्र करीब 462.150 हेक्टेयर है. जलाशय की सीमा को 1080 कंक्रीट ब्लॉक और खंभों से चिह्नित किया गया था. अब मौके पर सत्यापन कर यह देखा जाएगा कि इनमें से कितने सीमा-चिह्न अभी मौजूद हैं. पूर्व जांच में केरवा क्षेत्र में 33 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे. इनमें 18 सरकारी और 15 निजी जमीन से संबंधित संरचनाएं बताई गई थीं. अब ड्रोन सर्वे और जमीनी जांच से यह पता लगाया जाएगा कि इनमें से कितने अतिक्रमण अभी भी मौके पर मौजूद हैं और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है. एनजीटी के निर्देश के बाद केरवा जलाशय की सीमा, एफटीएल, बफर एरिया और अतिक्रमण की स्थिति सरकारी रिकॉर्ड और मौके की जांच के आधार पर स्पष्ट होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
-इन नामों की भी होगी मौके पर पड़ताल
पहले से दर्ज सूची में अजय सिंह पिता अर्जुन सिंह, राकेश लीला पिता पी.सी. लीला, शरदकुमार संधी, रामकिशन पिता देवीराम, डालचंद पिता मिश्रीलाल, सुरेश पिता देवीराम, बालकृष्ण पिता देवीराम, मेसर्स आईपीएस प्रालि के डायरेक्टर आलोक नंदा, डॉ. प्रमोद श्रीवास्तव, इन्द्रा पत्नी उमाकांत और पुजारी राजेंद्र शर्मा पिता रामेश्वर शर्मा के नाम शामिल हैं. सूची में विद्युत विभाग और शासकीय सेटेलाइट शाला, सरोतीपुरा के साथ लाल मियां, याकूत बी, मेहबूब, जावेद, शाहिद खां, बन्ने खां, मुकेश और कल्लू खां सहित अन्य नाम भी दर्ज हैं. इनके निर्माणों की वास्तविक स्थिति और एफटीएल से उनका संबंध जमीनी सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगा.
-29 अक्टूबर को खुलेगा सीमा का राज
एफटीएल तय होने के बाद उसके आसपास के बफर एरिया की सीमा भी स्पष्ट की जाएगी. एनजीटी ने समिति को ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी, ग्राउंड ट्रूथिंग और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पूरी प्रक्रिया करने के निर्देश दिए हैं. समिति को तीन सप्ताह में रिपोर्ट तैयार कर अगली सुनवाई में पेश करनी होगी. 29 अक्टूबर की सुनवाई में यह सामने आएगा कि 1080 सीमा-चिह्नों की स्थिति क्या है, 462.150 हेक्टेयर की एफटीएल जमीन पर कहां तक बैठती है और चिन्हित 33 निर्माण नई सीमा के मुकाबले कहां खड़े हैं
