
बालाघाट। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बालाघाट पहुंचकर कुपोषण और विभिन्न बीमारियों के कारण बच्चों को खो चुके आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से उनकी पीड़ा सुनी और बच्चों की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी ली। राहुल गांधी ने परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके दुख में सहभागी बनने की बात कही।
मुआवजा और बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
मीडिया से चर्चा में राहुल गांधी ने कहा कि बीमारी और कुपोषण के कारण कई बच्चों की मौत हुई है, लेकिन प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने दावा किया कि करीब आधे परिवार अभी भी आर्थिक सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जरूरतमंद परिवारों तक समय पर आवश्यक सरकारी सहायता नहीं पहुंच रही है।
जमीन और रोजगार का मुद्दा उठाया
राहुल गांधी ने आदिवासियों की जमीन, भूमि पट्टों और वनाधिकार कानून के तहत अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई मामले लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने पात्र आदिवासी परिवारों को उनके अधिकार दिलाने की मांग की।
मनरेगा को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि योजना का नाम बदल दिया गया है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में काम प्रभावी रूप से बंद है। उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।
संसद में मुद्दा उठाने की बात
राहुल गांधी ने सरकार पर विकास के दावों के बावजूद जमीन पर भ्रष्टाचार दिखाई देने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं ने आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर अस्पताल और स्कूल, मनरेगा के माध्यम से रोजगार तथा पात्र परिवारों को भूमि पट्टे और वनाधिकार देने की मांग की।
राहुल गांधी ने कहा कि बालाघाट में बच्चों की मौत और आदिवासियों से जुड़े व्यापक मुद्दों को वे संसद में उठाएंगे।
इस दौरान हरीश चौधरी, जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, ओमकार मरकाम, विक्रांत भूरिया, उषा नायडू, संजय उइके, अनुभा मुंजारे, विक्की पटेल, मुकेश नायक, हिना कावरे और अभिनव बारोलिया सहित कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
