
रीवा, रीवा के अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन NSUI ने गुरुवार को एक बेहद अनोखा और उग्र प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में एनएसयूआई के कार्यकर्ता और छात्र शहर के व्यस्त कॉलेज चौराहे से कलेक्ट्रेट कार्यालय तक लगभग 2 किलोमीटर की दूरी सड़क पर लेटकर, दंडवत परिक्रमा करते हुए तय की।
हाथों में नारियल लेकर और कलेक्ट्रेट पहुंचकर छात्रों ने महामहिम राज्यपाल के नाम एक 20 सूत्रीय मांग पत्र जिला प्रशासन को सौंपा। इस दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।सड़क पर लेटकर प्रदर्शन करने के कारण कई छात्रों के हाथ-पैरों में मामूली चोटें भी आईं। इस पर बात करते हुए एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा, “हमे कोई शौक नहीं है कि हम इस तरह जलती-तपती सड़क पर लेटकर अपने हाथ-पैर में चोट पहुंचाएं। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की तानाशाही ने हमें ऐसा करने पर मजबूर कर दिया है।
उन्होने आरोप लगाया की कुलपति अक्सर अपने चैंबर से नदारद रहते हैं। जब कुलपति ही उपस्थित नहीं रहेंगे, तो छात्र अपनी समस्याएं सुनाने कहां जाएं? इसी मजबूरी के कारण आज हमें कलेक्ट्रेट तक इस तरह आना पड़ा।”एनएसयूआई ने अपने 20 सूत्रीय ज्ञापन में विश्वविद्यालय प्रबंधन और विशेषकर कुलपति पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है और फैकल्टी के नाम पर करोड़ों का घोटाला हो रहा है।
‘संबल मेधावी योजना’ के अंतर्गत आने वाले गरीब और होनहार छात्रों को नियमों को ताक पर रखकर लूटा जा रहा है।विश्वविद्यालय प्रशासन पर विभिन्न छात्र संगठनों के साथ भेदभाव करने और दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया गया है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में भारी गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।
फिलहाल दंडवत होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्र नेताओं ने राज्यपाल के नाम सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि विश्वविद्यालय में चल रही इन सभी घोर अनियमितताओं की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
एनएसयूआई ने जिला प्रशासन के माध्यम से चेतावनी दी है कि यदि उनकी 20 सूत्रीय मांगों पर जल्द ही उचित निर्णय नहीं लिया गया और कुलपति के रवैये में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में छात्र संगठन इससे भी अधिक उग्र और व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
