जबलपुर: प्रदेश में हुए धान घोटाले के मामले में दर्ज की गयी एफआईआर के संबंध में हाईकोर्ट में विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की गयी। सरकार व सिविल सप्लाई कारपोरेशन की तरफ से विस्तृत जवाब पेश करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 6 सप्ताह बाद निर्धारित की है।
नागरिक उपभोक्ता मंच की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेका के आदेश पर की गयी प्रशासनिक जांच में जबलपुर जिले में ही 34 करोड रूपये का धान घोटाला प्रकाश में आया था। जांच में पाया गया था कि धान उपार्जन और परिवहन के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया। जांच के दौरान पाया गया कि 100 से 200 क्विंटल तक धान का परिवाहन दोपहिया और तिपहिया वाहनों से किया गया। कई ऐसे स्कूटर, ऑटो और यात्री बसों के पंजीयन नंबर दर्ज मिले, जिनसे भारी मात्रा में अनाज का परिवाहन तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है। इस फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद जबलपुर जिले में 90 व्यक्तियों और ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गईं थी।
याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया था कि धान घोटाले के तार प्रदेश के अन्य जिलों से जुड़े हुए है। मंडला, डिंडोरी, सिवनी बालाघाट में कुछ प्रकरण दर्ज हुआ है। प्रदेश सरकार ने 27 जिला कलेक्टरों को धान घोटाले की जांच करने के संबंध में आदेश जारी किए थे। जिससे स्पष्ट है कि यह प्रदेश स्तरीय घोटाला है।
युगलपीठ ने पूर्व में याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा था कि प्रदेश सरकार ने 27 जिला कलेक्टरों को जांच के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम नहीं आए। युगलपीठ ने प्रदेश सरकार व नागरिक आपूर्ति निगम को प्रदेश स्तर में की गयी जांच के संबंध में शपथ-पत्र के साथ जानकारी पेश करने के निर्देश जारी किये थे। युगलपीठ ने ईओडब्ल्यू को निर्देशित किया है कि धान घोटाले के संबंध में दर्ज किये गये प्रकरण की स्टेटस रिपोर्ट पेश करें।
