नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना कृषि क्षेत्र के विकास के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने मंगलवार को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की 97वीं वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता करते हुए कृषि अनुसंधान को किसानों की जरूरत, बाजार की मांग और उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं से जोड़ने पर जोर दिया।
चौहान ने कहा कि अब लक्ष्य केवल खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेत से वैश्विक बाजार तक भारत की मजबूत पहचान बनाना है। अनुसंधान का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि उसका लाभ कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचता है। उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने दलहन, तिलहन, बीज, पशुधन और मूल्यवर्धित प्रसंस्करण में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने बताया कि 386 नई फसल किस्में जारी हुई हैं, जिनमें 94 प्रतिशत जलवायु-प्रतिरोधी हैं। पिछले वर्ष करीब 805 बौद्धिक संपदा आवेदन भी दाखिल किए गए।
