सराफा चौपाटी को लेकर हाईकोर्ट आदेश, अंतिम अधिकार व्यापारियों का

इंदौर: सराफा चौपाटी को लेकर नगर निगम द्वारा जारी ठेला व्यापारियों की सूची हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है. हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि चौपाटी लगने देना या नहीं लगने देने का अधिकार सिर्फ सराफा व्यापारियों का है. कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निगम सिर्फ अग्नि और सफाई व्यवस्था करने का अधिकारी, दुकानें तय करने का नहीं है.
हाईकोर्ट ने सराफा चौपाटी को लेकर बड़ा निर्णय कर दिया है.

इसके तहत अब सराफा बाजार में रात को लगने वाली खानपान चौपाटी को लेकर आदेश दिया है कि सराफा में चौपाटी लगने का अधिकार सिर्फ सराफा व्यापारी को ही है. सराफा व्यापारी शपथपत्र लेकर अनुमति दे सकते हैं. नगर निगम को सराफा चौपाटी में दुकानें तय करने का अधिकार नहीं है. हाईकोर्ट में नगर निगम द्वारा सराफा चौपाटी के लिए 80 दुकानें को सूची बद्ध करने के खिलाफ याचिका दायर की गई थी. उक्त मामले हाईकोर्ट ने निर्णय सुना दिया है. हाईकोर्ट के आदेश से सराफा व्यापारी खुश है और एसोसिएशन के माध्यम से आगे चौपाटी को लेकर निर्णय लेंगे.

एसोशिएशन के कोषाध्यक्ष अजय लाहोटी ने कहा कि कोर्ट आदेश सराहनीय है. हम किसी की रोजी रोटी नहीं छीनना चाहते है, लेकिन चौपाटी के व्यापारी शाम को जल्दी आते है और हमारा व्यापार प्रभावित होता है. दुकानें के ओटले शपथ पत्र के माध्यम से ही दिए जाते है, लेकिन अब व्यापारी की मर्जी वो ठेले लगाने दे या नहीं. आगे निर्णय एसोशिएशन में व्यापारियों के साथ बैठक करके लिया जाएगा. सराफा चौपाटी को नेहरू पार्क या गांधी हॉल में शिफ्ट करना चाहिए.

निर्णय का अध्ययन नहीं किया
निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय आया है, लेकिन उसका अध्ययन नहीं किया है. सफाई और अग्नि सुरक्षा निगम करता ही है. अब देखते हैं कैसे चौपाटी और व्यापारियों को रेगुलेटेड मैनेट कर सकते है.

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