नयी दिल्ली, 30 सितंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को संकेत दिया कि वह दिवाली के दौरान निर्धारित समय-सीमा के भीतर विशिष्ट श्रेणियों के पटाखों को फोड़ने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह न तो पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगायेगा और न ही पूरे दिन अनियंत्रित रूप से पटाखे जलाने की अनुमति देगा।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से त्यौहार मनाने वाले लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं, जबकि बिना किसी समय सीमा के पटाखे जलाने की अनुमति देने से पर्यावरण के साथ-साथ बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों जैसे लोगों पर खराब प्रभाव पड़ेगा। पीठ ने शर्तों के साथ लड़ी (‘लड़ी’ या जॉइंट क्रैकर्स) को इजाजत देने के प्रस्ताव को भी स्वीकार करने का रुझान दिखाया। न्यायालय ने कहा कि निर्धारित समय और आवश्यक मानकों को पूरा करने वाले पटाखों को फोड़ने की इजाजत देकर एक संतुलन बनाना होगा।
उच्चतम न्यायालय ने यह बात दिल्ली-एनसीआर और अन्य उत्तरी राज्यों में पटाखों के नियमन से जुड़ी दीर्घकालिक याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। सुनवाई के दौरान अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बेरियम-आधारित पटाखों के संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा। उन्होंने कहा कि ऐसे पटाखों का परीक्षण अभी होना बाकी है। तब पीठ ने कहा कि वह अंतिम निर्णय लेने से पहले बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करेगी।
उल्लेखनीय है कि यह मामला 2015 में दायर एक याचिका से संबंधित है, जिसमें न्यायालय ने हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए पटाखों के निर्माण, बिक्री और उपयोग को विनियमित करने के लिए समय-समय पर कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने एक चरण में दिल्ली में पूर्ण प्रतिबंध लगाया था, बाद में उसने 2025 में दिवाली के आसपास सीमित अवधि के लिए स्वीकृत ‘ग्रीन क्रैकर्स’ (हरित पटाखों) की बिक्री और उपयोग की अनुमति दी थी।
