नौसेना सम्मेलन: समुद्री युद्ध के बदलते स्वरूप के बीच तकनीक, डेटा साझा करने और तीनों सेनाओं के एकीकरण पर जोर

नयी दिल्ली 30 सितम्बर (वार्ता) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव, डेटा के निर्बाध रूप से साझा किये जाने और सेनाओं के बीच अधिक एकीकरण की जरूरत पर बल दिया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने समुद्री क्षेत्र की मौजूदा और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च स्तर की युद्ध तत्परता, चुस्ती और त्वरित प्रतिक्रिया बनाये रखने तथा प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने की आवश्यकता बतायी है।

दोनों अधिकारियों ने नौसेना कमांडरों के सम्मेलन के दूसरे दिन कमांडरों को संबाेधित करते हुए ये बातें कही। मंगलवार को शुरू हुए तीन दिन के सम्मेलन को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले दिन संबोधित किया था। सम्मेलन में भारतीय नौसेना का वरिष्ठ नेतृत्व हिस्सा ले रहा है। सम्मेलन में संचालन की तैयारी, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की सैन्य क्षमताओं के विकास पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। जनरल सुब्रमणि ने भारतीय नौसेना को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया । उन्होंने प्रौद्योगिकी को अपनाने, आत्मनिर्भरता और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में नौसेना के प्रयासों की सराहना की। युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव, डेटा के निर्बाध डेटा साझा करने और मजबूती तथा निरंतर संचालन क्षमता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इन प्रयासों के लिए तीनों सेनाओं के बीच अधिक र एकीकरण को महत्वपूर्ण बताया।

एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने मौजूदा समुद्री सुरक्षा माहौल में नौसेना की संचालन संबंधी स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने समुद्री क्षेत्र में वर्तमान और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च स्तर की युद्ध तत्परता, चुस्ती और त्वरित प्रतिक्रिया बनाए रखने पर जोर दिया। इसके साथ ही प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने और सैन्य क्षमताओं के विकास में तेजी लाने की आवश्यकता बतायी।
रक्षा मंत्री ने सम्मेलन के पहले दिन अपने संबोधन में भारत की समुद्री क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक जिम्मेदारियों का उल्लेख किया। उन्होंने हिन्द महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना को संकट के समय सबसे पहले मदद देने वाला बल और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार बताया। उन्होंने समुद्री निगरानी, विश्लेषण की क्षमता और संचालन संबंधी त्वरित प्रतिक्रिया को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

पश्चिम एशिया की स्थिति के संदर्भ में रक्षा मंत्री ने नौसेना द्वारा चलाये गये ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में उसके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने आत्मनिर्भरता, स्वदेशी क्षमता के विकास और प्रौद्योगिकी को अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित समुद्र एक सुरक्षित और विकसित राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी नौसेना कमांडरों के साथ बातचीत की। इसमें तीनों सेनाओं के बीच तालमेल, एक-दूसरे के साथ काम करने की क्षमता और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के लिए एकीकृत प्रतिक्रिया को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। सम्मेलन के बाकी सत्रों में संचालन, रसद, मानव संसाधन, प्रशिक्षण, सैन्य बल के विकास और उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल करने जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जायेगा। युद्ध की तैयारी मजबूत करने और सैन्य क्षमताओं के विकास में तेजी लाने के उपायों की भी समीक्षा होगी।

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