नयी दिल्ली, 30 सितंबर (वार्ता) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत हटाये गये 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम और उन्हें वोट देने से वंचित करने की वजह सार्वजनिक की जानी चाहिए।
श्री खरगे ने बुधवार को यहां विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी वास्तविक भारतीय नागरिक को अपारदर्शी, मनमानी या अपर्याप्त निगरानी वाली प्रक्रिया के जरिये मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यदि नाम हटाये गये हैं, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसका नाम हटाया गया और क्यों। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 की भावना के अनुरूप स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग के बिना विश्वसनीय चुनाव संभव नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त के दो सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार इस प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज की हैं लेकिन उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया, इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जाना चाहिए या उन्हें स्वयं इस्तीफा देना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की चयन समिति से उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया। उन्होंने चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के संबंध में दी गयी कानूनी सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया और उच्चतम न्यायालय की उस टिप्पणी का उल्लेख भी किया, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग का स्वतंत्र होना ही नहीं, बल्कि उसका स्वतंत्र दिखाई देना भी जरूरी है।
श्री खरगे ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए फार्म-6 में किये गये बदलावों पर भी सवाल उठाये और कहा कि युवाओं के लिए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और सुलभ होनी चाहिए तथा सभी अनावश्यक बाधाओं को तत्काल हटाया जाना चाहिए। ईवीएम के संबंध में उन्होंने कहा कि मतदान बैलेट पेपर से कराया जाना चाहिए, ताकि चुनाव व्यवस्था में लोगों का विश्वास और भरोसा बहाल हो सके।
उन्होंने प्री-एसआईआर मतदाता सूची को भविष्य के चुनावों में इस्तेमाल करने, मतदाता सूची में विधानसभा और बूथ स्तर पर नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की पूरी जानकारी देने तथा किसी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले नोटिस, कारण और प्रभावी अपील का अवसर देने की मांग की।
श्री खरगे ने कहा कि प्रशासनिक खामियों, अपर्याप्त दस्तावेजों या जागरूकता की कमी के कारण पात्र मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने और सभी राजनीतिक दलों का विश्वास कायम करने वाली व्यवस्था को आवश्यक बताया और कहा कि चुनाव में पारदर्शिता से ही लोकतंत्र मजबूत होगा।

