नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) की उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश की चुनावी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खरगे ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की नींव ‘एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य’ के सिद्धांत पर टिकी है, लेकिन वर्तमान में इस पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत देश भर में 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे नागरिकों के मताधिकार पर सीधा हमला करार दिया।
ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठे सवाल, राहुल गांधी के सबूतों को नजरअंदाज करने का लगाया गंभीर आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने राहुल गांधी द्वारा महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक के महादेवपुरा जैसे इलाकों में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी से जुड़े सबूत पेश करने का जिक्र करते हुए कहा कि तमाम डेटा और सबूत देने के बावजूद चुनाव आयोग ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एक निष्पक्ष संस्था के रूप में काम करने के बजाय सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहा है। खरगे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और उनके साथी आयुक्तों के बीच पिछले 10 महीनों में सामने आए अंदरूनी मतभेदों ने आयोग की निष्पक्षता पर गहरी कलई खोल दी है, इसलिए नैतिक आधार पर उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
चुनाव सुधार के लिए खरगे ने रखीं 6 प्रमुख मांगें, भविष्य के चुनावों में बैलेट पेपर की वापसी पर जोर
बैठक के अंत में विपक्षी दलों की ओर से चुनाव सुधार को लेकर 6 सूत्रीय मांगें रखी गईं, जिनमें भविष्य के चुनावों के लिए ‘प्री-SIR’ मतदाता सूची का इस्तेमाल करना, मतदाता सूची में हर बदलाव में पूरी पारदर्शिता रखना, और किसी भी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले उचित कारण बताना शामिल है। इसके साथ ही, विपक्षी गठबंधन ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद कर देश में दोबारा बैलेट पेपर (मतपत्र) से मतदान प्रक्रिया शुरू करने की पुरजोर मांग की है, ताकि भारतीय चुनाव प्रणाली में आम जनता का खोया हुआ भरोसा फिर से बहाल किया जा सके।

