वाशिंगटन, अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चली आ रही आर्थिक तकरार अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कनाडा को बड़ा झटका देते हुए करीब 1 अरब डॉलर मूल्य की कनाडाई वस्तुओं के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। मंगलवार आधी रात से लागू हुए इस कड़े प्रतिबंध ने दोनों पड़ोसी देशों के दशकों पुराने व्यापारिक संबंधों में भारी कड़वाहट पैदा कर दी है। हालांकि दोनों देशों के बीच होने वाले कुल 880 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के मुकाबले यह राशि छोटी है, लेकिन इस रणनीतिक फैसले ने राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
जवाबी टैरिफ और डेयरी विवाद बना तनाव की मुख्य वजह, शराब उद्योग और छोटे डिस्टिलर्स पर पड़ी सबसे भारी मार
यह पूरा विवाद राष्ट्रपति ट्रंप के उस व्यापक व्यापार अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत उन्होंने कनाडाई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा दिया था। अमेरिका का आरोप था कि कनाडा अमेरिकी डेयरी, शराब और ऑटोमोबाइल निर्माताओं के साथ भेदभावपूर्ण नीतियां अपना रहा है। इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी सामानों पर ‘जैसे को तैसा’ नीति अपनाते हुए भारी जवाबी टैरिफ लगा दिए और स्टोर्स से अमेरिकी शराब हटानी शुरू कर दी। इसी जवाबी कार्रवाई से भड़के ट्रंप प्रशासन ने अब सीधे तौर पर कनाडाई उत्पादों को बैन करने का फरमान जारी कर दिया है। इस प्रतिबंध की सबसे मारक चोट कनाडाई शराब उद्योग और सीमा पर स्थित छोटे स्वतंत्र डिस्टिलर्स पर पड़ी है।
अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करने की रणनीति में जुटे पीएम मार्क कार्नी, यूएसएमसीए (USMCA) समझौते पर मंडराए संकट के बादल
इस गंभीर संकट के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आक्रामक वैश्विक अभियान शुरू कर दिया है। वर्तमान में कनाडा का 70 प्रतिशत से अधिक निर्यात अमेरिका पर निर्भर है, लेकिन पीएम कार्नी ने स्पष्ट कर दिया है कि कनाडा आने वाले दशक में अमेरिका से इतर अन्य देशों के साथ अपने व्यापार को दोगुना करेगा ताकि अमेरिकी धमकियों से बचा जा सके। इस ताजा टकराव ने उत्तरी अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक समझौते ‘यूएसएमसीए’ (USMCA) के भविष्य पर भी गंभीर संकट के काले बादल खड़े कर दिए हैं, और दोनों देशों के बीच राजनीतिक खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है।

