लोअर लेक प्रदूषण: NGT का भोपाल ननि को निर्देश, पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर 45 हजार का जुर्माना

भोपाल। लोअर लेक में अनुपचारित सीवेज के सीधे पहुंचने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने संबंधित विभागों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. 28 सितंबर 2026 को मूल आवेदन संख्या 58/2026 (सीजेड), राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर भोपाल एवं अन्य मामले की सुनवाई हुई. आवेदक की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्द्धन तिवारी ने पैरवी की. सुनवाई न्यायमूर्ति शेओ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की. मामले में लोअर लेक में अनुपचारित सीवेज के सीधे प्रवाह, वेटलैंड को प्रभावित करने वाले अनधिकृत निर्माण और प्रोफेसर कॉलोनी, सिविल लाइंस में पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के मुद्दे उठाए गए.

-दो नालों से रोज 8 एमएलडी सीवेज

सुनवाई में पेश रिपोर्ट के अनुसार लोअर लेक में पहले चिन्हित 37 नालों में से सभी को इंटरसेप्ट कर एसटीपी की ओर डायवर्ट किया गया है. हालांकि, दो नालों से अभी भी अनुपचारित सीवेज सीधे झील में पहुंच रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक बाणगंगा नाले से करीब 6 एमएलडी और पुराना मछली घर के पास बाणगंगा नाला क्षेत्र से करीब 2 एमएलडी सीवेज रोज लोअर लेक में पहुंच रहा है. इस तरह कुल करीब 8 एमएलडी अनुपचारित सीवेज प्रतिदिन झील में जा रहा है. सीवेज के उपचार के लिए भोपाल नगर निगम ने 10 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का काम 11 सितंबर 2026 से शुरू किया है. इसे 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

-2.10 करोड़ रुपए क्षतिपूर्ति का आकलन

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई रिपोर्ट में एनजीटी के पूर्व आदेशों के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना की गई है. रिपोर्ट में 31 मार्च 2026 से 31 दिसंबर 2027 तक 21 महीने की अवधि और दो नालों को आधार बनाया गया है. 5 लाख रुपए प्रति नाला प्रति माह की दर से गणना करने पर राशि 2.10 करोड़ रुपए आती है. हालांकि, यह राशि एनजीटी द्वारा अंतिम रूप से तय की गई क्षतिपूर्ति नहीं है. रिपोर्ट में इसे ट्रिब्यूनल के अंतिम निर्धारण, उल्लंघन की वास्तविक अवधि और सीवेज उपचार की व्यवस्था के सत्यापन के अधीन बताया गया है.

-पीएचईडी के प्रमुख सचिव को पक्षकार बनाया

सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से बताया गया कि सीवेज ट्रीटमेंट और झील के विभिन्न हिस्सों के रखरखाव में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की भूमिका है. इस पर ट्रिब्यूनल ने विभाग के प्रमुख सचिव को मामले में आवश्यक पक्षकार के रूप में शामिल किया. विभाग को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने और 15 दिनों में जवाब तथा कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं.

-वेटलैंड और पेड़ों को नुकसान पर भी कार्रवाई

एनजीटी ने नगर निगम को वेटलैंड की सुरक्षा, अनुपचारित और अपशिष्ट जल को जल निकायों में जाने से रोकने तथा अनधिकृत निर्माण हटाने और रोकने के संबंध में 15 दिनों में जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा है. प्रोफेसर कॉलोनी, सिविल लाइंस में पेड़ों को रसायन के माध्यम से नुकसान पहुंचाने का मामला भी सुनवाई में आया. एमपीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित भूमि मालिक मोहम्मद अनीस खान को नोटिस दिया गया था. जवाब नहीं मिलने पर मध्य प्रदेश वृक्ष संरक्षण (शहरी क्षेत्र) अधिनियम, 2004 और संबंधित नियम, 2002 के तहत 45 हजार रुपए का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी दी गई. वन विभाग को भी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

 

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