
बालाघाट, जिले में मंगलवार को फिर एक नर टाइगर की मौत हो गई। नहलेसरा डेम में तैरता हुआ उसका शव मिला है। हालांकि अभी टाइगर की मौत की वजह साफ नहीं हो पाई है, लेकिन पोस्टमार्टम के दौरान पेट पूरी तरह खाली मिलने से आशंका जताई जा रही है कि बुजुर्ग टाइगर की मौत भूख से हुई होगी। लगातार हो रही टाइगरों की मौतों ने वन विभाग की वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मंगलवार को दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच वन विभाग को सूचना मिली कि कटंगी परिक्षेत्र के नहलेसरा बीट के कक्ष क्रमांक 562 में स्थित नहलेसरा डेम में टाइगर का शव तैर रहा है। सूचना मिलते ही कटंगी परिक्षेत्र का अमला और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। सूचना सिवनी और बालाघाट दोनों जिलों से जुड़ी होने के कारण दोनों जगह का वन अमला मौके पर पहुंचा।
कटंगी परिक्षेत्र के एसडीओ यशपाल मेहरा ने बताया कि नहलेसरा डेम का एक हिस्सा सिवनी जिले में और दूसरा हिस्सा बालाघाट जिले में आता है, इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मृत मिला टाइगर पेंच टाइगर रिजर्व का है या बालाघाट के जंगल का। उसकी प्रोफाइल पता की जा रही है।
मौके पर पहुंचे अमले ने शाम करीब 4 बजे शव को डेम से बाहर निकाला। शव 2 से 3 दिन पुराना बताया जा रहा है और पानी में रहने के कारण फूल गया था। घटनास्थल पर डॉग स्क्वाड की मदद से सर्चिंग भी कराई गई। इसके बाद पेंच टाइगर रिजर्व से पहुंचे वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा द्वारा एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार शव का पोस्टमार्टम किया गया।
एसडीओ मेहरा ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान टाइगर के हार्ट, लंग्स, स्कीन और अन्य पार्ट्स को बिसरा के रूप में सुरक्षित कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। यह वृद्ध टाइगर था, जिसकी उम्र करीब 13 से 14 साल थी। उसके दांत घिसे हुए थे और एक केनाइन दांत टूटा हुआ था। अच्छी बात यह रही कि उसके सभी दांत और नाखून सुरक्षित मिले हैं। शरीर पर कहीं भी चोट के निशान नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि शव मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों सीसीएफ और डीएफओ बालाघाट की मौजूदगी में नियमानुसार शव का अंतिम संस्कार किया गया। फिलहाल मौत को लेकर अंतिम रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी। एक-दो दिन में पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही टाइगर की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो पाएगी। गौरतलब है कि जिले में पिछले कुछ महीनों में टाइगरों की मौत के मामले बढ़े हैं। ऐसे में बुजुर्ग टाइगर की भूख से संभावित मौत ने वन प्रबंधन और वन्यजीवों के लिए भोजन व सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
