तेहरान, 29 सितंबर (वार्ता) अमेरिकी जनता को भेजा गया ईरान का पत्र केवल मीडिया प्रचार का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ईरान के रुख और उसकी तर्कसंगत सोच को सीधे और पारदर्शी तरीके से उनके सामने रखना है।ईरानी सैन्य बल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम की एक रिपोर्ट के अनुसार आईआरजीसी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में अमेरिकी नागरिकों को यह पत्र भेजने के पीछे के मुख्य उद्देश्यों की व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का मकसद केवल अल्पकालिक मीडिया कवरेज हासिल करना नहीं है। यदि इसका उद्देश्य केवल प्रचार होता, तो ईरान सोशल मीडिया पोस्ट या अन्य सामान्य मीडिया गतिविधियों के जरिए तात्कालिक प्रभाव पैदा कर सकता था। इसके विपरीत, ईरान ने अमेरिकी जनता से ईमानदार, तर्कसंगत और वास्तविक तरीके से संवाद करने का फैसला किया है।
श्री मोहेब्बी ने कहा कि ईरान का मानना है कि कई अमेरिकी नागरिक ईरान के वास्तविक रुख और उसकी तार्किक सोच से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। इसलिए, यह पत्र उन्हें सीधे तौर पर स्थिति को समझने का एक मंच प्रदान करता है। उन्होंने आगे बताया कि अमेरिका के पास सैकड़ों टीवी और रेडियो नेटवर्क हैं, जिनके माध्यम से वह चौबीसों घंटे दुनिया भर के लोगों से संवाद कर सकता है। इसके विपरीत, अमेरिका में ईरान के मीडिया साधनों की पहुंच की कमी है। इसी जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए अपने संदेश को स्पष्ट रूप से पहुंचाने के लिए पत्र का माध्यम चुना गया है।
आईआरजीसी प्रवक्ता ने अमेरिकी नागरिकों से इस पत्र को कम से कम एक बार पढ़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस पर प्रतिक्रिया देना चाहते हैं, आलोचना करना चाहते हैं या अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगते हैं, ईरान उनके साथ पत्राचार के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके लिए जल्द ही एक आधिकारिक पता मीडिया के माध्यम से जारी किया जाएगा।
पत्र में अमेरिका की भौगोलिक स्थिति और उसके रक्षात्मक प्रभावों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाया गया है। श्री मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिका चारों तरफ से महासागरों से घिरा हुआ है, जो उसे एक प्राकृतिक सुरक्षा और रक्षात्मक बढ़त प्रदान करता है। अमेरिका की थल या जल सीमाओं से सटे पड़ोसी देशों के पास ऐसी सैन्य या सुरक्षा क्षमताएं नहीं हैं जो उस देश के लिए कोई गंभीर खतरा पैदा कर सकें। इस वास्तविकता को रेखांकित करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं है, तो दुनिया भर में 800 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तैनात करने का क्या उद्देश्य है? इसके अलावा, 1.1 ट्रिलियन डॉलर के विशाल अमेरिकी सैन्य बजट का आर्थिक और तार्किक औचित्य क्या है?
श्री मोहेब्बी ने ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र करते हुए अमेरिकियों से अतीत की सच्चाइयों को नजरअंदाज न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पिछले सात दशकों में विभिन्न देशों पर हुए अमेरिकी सैन्य हमलों के रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल उठाए जाने चाहिए। अमेरिकी मीडियाकर्मियों और आम जनता को सीधे संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि अमेरिका ने पिछले सात दशकों में कई देशों पर सैन्य हमले किए हैं। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से आह्वान किया कि वे इन अनगिनत हमलों की जमीनी हकीकत और दशकों में सामने आए इनके गंभीर परिणामों का सामना करें।
