श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर चल रही राजनीतिक सरगर्मी के बीच एक दिलचस्प और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और उसके सहयोगी दलों के विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए राज्य के दर्जे के प्रस्ताव में आधिकारिक तौर पर संशोधन (Amendments) की मांग कर दी है। इन संशोधनों में प्रमुख रूप से 5 अगस्त 2019 से पहले की स्थिति बहाल करते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A को पुनः लागू करने का संकल्प शामिल करने की मांग की गई है, जिससे सत्तारूढ़ खेमे में भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
तनाव और राजनीतिक दबाव के बीच असहमति के सुर, विपक्षी दलों के तीखे तेवर के बीच सदन का माहौल हुआ गरमाया
इससे पहले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश कर केंद्र सरकार से तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की थी, जिसमें वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का भी जिक्र था। हालांकि, अब नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक, जाविद हसन बेग, एजाज जान, अल्ताफ अहमद वानी और हिलाल अकबर लोन सहित कई अन्य नेताओं ने अलग-अलग संशोधन प्रस्ताव सौंपकर इस दायरे को और व्यापक बना दिया है। इसके अलावा निर्दलीय विधायकों और पीडीपी के वहीद पारा व आगा सैयद मुंतजिर मेहदी ने भी एकतरफा केंद्रीय फैसलों पर गहरी नाराजगी जताते हुए ऑटोनॉमी और पुराने विशेष दर्जे की बहाली पर जोर दिया है।
विधानसभा का पटल बनेगा असली राजनीतिक अखाड़ा, प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा पर टिकी हैं पूरे देश की निगाहें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर उनकी ही पार्टी के विधायकों द्वारा अलग-अलग संशोधन पेश किए जाने से इसकी भाषा, मूल भावना और दायरे को लेकर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। विपक्षी दल पहले ही इस प्रस्ताव के विरोध में आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, और अब सदन के भीतर इन नए संशोधनों के जुड़ने से यह सत्र और अधिक संघर्षपूर्ण हो गया है। आगामी बहसों के दौरान यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इस आंतरिक और बाहरी राजनीतिक दबाव के बीच सदन में क्या रुख अपनाती है।

