श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही सोमवार को शुरू होते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। सदन के फिर से शुरू होने पर भाजपा विधायक और मुख्य सचेतक आरएस पठानिया ने बड़ा कदम उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया और उन्हें हटाने की मांग की। भाजपा का आरोप है कि पिछले शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए राज्य के दर्जे के प्रस्ताव में साल 2000 के ‘ऑटोनॉमी’ (स्वायत्तता) प्रस्ताव का जिक्र किया गया था, जो भारत के संविधान के खिलाफ है और स्पीकर ने नियमों का उल्लंघन करते हुए इसे मंजूरी दी है।
स्पीकर ने खारिज की मांग, कहा- बिना लिखित नोटिस और प्रक्रिया के सदन में ऐसा कदम उठाना असंवैधानिक
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने भाजपा के प्रस्ताव को नियमों के विपरीत बताया। उन्होंने सदन को स्पष्ट किया कि किसी भी सदस्य को स्पीकर के खिलाफ मोशन लाने के लिए विधानसभा सचिवालय को विधिवत लिखित नोटिस देना होता है, जो इस मामले में नहीं किया गया है। स्पीकर ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक प्रैक्टिसिंग वकील होने के बावजूद विपक्षी सदस्यों ने संविधान की सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। उन्होंने भाजपा नेताओं से प्रश्नकाल के दौरान सदन की मर्यादा बनाए रखने और अपने निर्धारित समय पर चर्चा में भाग लेने का अनुरोध किया।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा का बयान, कहा- राज्य के दर्जे के पक्ष में हैं लेकिन 1953 की स्थिति बहाल करने वाला प्रस्ताव मंजूर नहीं
इस पूरे विवाद पर भाजपा के नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने के पक्ष में है, लेकिन प्रस्ताव में जिस तरह से 1953 से पहले की स्वायत्तता और पुराने विवादास्पद प्रस्तावों का उल्लेख किया गया है, वह स्वीकार्य नहीं है। इस दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ और भाजपा विधायक “कुर्सी छोड़ो” व “वंदे मातरम” के नारे लगाते हुए वेल में आ गए। सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तीखी नोकझोंक के चलते सदन का माहौल गरमाया रहा।

