जबलपुर: पितृपक्ष को केवल अश्रु और तर्पण तक सीमित न रखते हुए इसे देव आराधना और आत्मशुद्धि का दिव्य अनुष्ठान बताया गया। भक्ति धाम, गौरीघाट में नर्मदा तट पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन व्यास पीठ से भागवताचार्य स्वामी श्री अशोकानंद जी महाराज ने कहा कि पितृपक्ष धरा और देवलोक को जोड़ने वाला पुण्यदायी कालखंड है। उन्होंने संकष्टी आराधना, जीवित्पुत्रिका व्रत, मोक्षदायिनी इन्दिरा एकादशी और सर्वपितृ अमावस्या के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को देव आराधना और आत्मशुद्धि का संदेश दिया।
भक्ति धाम गौरीघाट में 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर 4 बजे से स्वामी अशोकानंद जी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का श्रवण कराया जा रहा है। आयोजन में भागवत सेवा समिति के गोपाल, पप्पू, विजय उमेश पारवानी, वेदान्त शर्मा, करिश्मा शर्मा, जया लालवानी, हितिशा शर्मा, विनू माखीजा, ममता कुकरेजा, घनश्याम निरंकारी, दिलीप तलरेजा, नरेंद्र, पुष्पराज पंडित, लालू महाराज, अभिषेक और रामजी पुजारी ने श्रद्धालु भक्तों से कथा में उपस्थित होकर पुण्यलाभ लेने का आग्रह किया है।
