दिल्ली के अंतिम वैध मतदाता का वोट बनवाना सुनिश्चित करें भाजपा के बीएलए: मल्होत्रा

नयी दिल्ली, 27 सितम्बर (वार्ता) दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने रविवार को पार्टी के बुथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि प्रदेश के अंतिम वैध मतदाता का वोट बन जाए।

श्री मल्होत्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पार्टी के एजेंटों को सम्बोधित किया और कहा कि वह सभी चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त बीएलए से समन्वय से काम करें और अंतिम वैध वोटर तक का वोट बनवाना सुनिश्चित करें।

इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और पूरा विपक्ष देश की संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग पर जानबूझकर दुष्प्रचार कर रहा है। आयोग ने शनिवार को इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई के नहीं कटेगा।

उन्होंने कहा, “ये वही लोग हैं जो 12 साल से लगातार चुनाव हार रहे हैं। केंद्र में 2014, 2019 और 2024 में जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया। दिल्ली में भी जनता ने हमें चुना। हार का ठीकरा अब ये चुनाव आयोग पर फोड़ रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद संभाले हुए अभी दो साल ही हुए हैं, तो क्या 12 साल की हार के लिए वह जिम्मेदार हैं? ये तर्क ही हास्यास्पद है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। उसके तीन आयुक्त मिलकर सर्वसम्मति से फैसले लेते हैं। उस पर सवाल उठाना लोकतंत्र पर सवाल उठाना है। इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने ही सबसे ज्यादा चुनाव आयोग और लोकतंत्र को कुचला है।

उन्होंने कहा कि आज लोकतंत्र-लोकतंत्र चिल्लाने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दादी श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने ही देश पर आपातकाल थोपा था। प्रेस बंद, कोर्ट बंद, विपक्ष जेल में, यही कांग्रेस का लोकतंत्र था।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में चुनाव आयुक्त सेवानिवृत्त होते ही राज्यपाल और सांसद बना दिए जाते थे। देश अभी एस.एल. शकधर एवं एम.एस. गिल का उदाहरण भूला नहीं है। उन्होंने कहा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन जैसे अधिकारी खुलकर कहते थे कि उन पर कितना दबाव था। चुनाव आयोग को कठपुतली बना दिया गया था।

उन्होंने कहा कि आज वही कांग्रेस ‘वोट चोरी’ का झूठा दुष्प्रचार कर रही है। एसआईआर का मकसद ही नकली, फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को शुद्ध करना है। वर्ष 2002 की मतदाता सूची से मिलान इसीलिए किया जा रहा है ताकि पारदर्शिता रहे। आयोग ने दावे-आपत्तियों की तारीख 30 अक्टूबर और जवाब की तारीख 30 नवंबर तक बढ़ा भी दी है। फिर दिक्कत क्या है ?

उन्होंने कहा, “मैं देश और दिल्ली की जनता से अपील करता हूं कि इनके बहकावे में न आएं। विपक्षी नेता चुनाव हारने के बाद ईवीएम को दोष देते हैं, चुनाव आयोग को दोष देते हैं, पुलिस को मीडिया को दोष देते हैं पर अपनी हार की जिम्मेदारी कभी खुद नहीं लेते।”

उन्होंने कहा, “भाजपा चुनाव आयोग की निष्पक्षता में पूर्ण विश्वास रखती है। हम आयोग के साथ हैं। लोकतंत्र की रक्षा के लिए जो भी जरूरी कदम आयोग उठाएगा, भाजपा उसका स्वागत करेगी। जिन लोगों ने आपातकाल लगाया, जिन्होंने चुनाव आयुक्तों को सांसद बनाया, वो आज संविधान और लोकतंत्र की बात करें – इससे बड़ा मजाक कुछ नहीं हो सकता।”

 

 

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