MP में साइबर ठगी का बड़ा जाल: 32 महीनों में 1.55 लाख शिकायतें, ₹1,402 करोड़ से ज्यादा की चपत

 

भोपाल। मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ने पैसों के लेन-देन को आसान बनाया है, लेकिन इसी सुविधा के साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ रहा है। साइबर ठग अब सिर्फ फर्जी कॉल या मैसेज के जरिए ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसे कई स्तरों पर घुमा रहे हैं।

नवभारत की पड़ताल में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में 32 महीनों के दौरान 1 लाख 55 हजार 424 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हुईं। इस दौरान ठगी की कुल रकम 1 हजार 402 करोड़ 22 लाख रुपये तक पहुंच गई।

2024 में 47 हजार से ज्यादा शिकायतें

आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में 47 हजार 810 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हुईं। इन मामलों में करीब 464 करोड़ 45 लाख रुपये की ठगी सामने आई।*2025 में बढ़ी शिकायतें और रकम*

साल 2025 में शिकायतों की संख्या बढ़कर 55 हजार 382 हो गई। इस दौरान साइबर ठगी की रकम भी बढ़कर 632 करोड़ 45 लाख रुपये तक पहुंच गई।

2026 में 31 अगस्त तक 52 हजार से ज्यादा शिकायतें

वहीं 2026 में 31 अगस्त तक 52 हजार 232 शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। इस अवधि में करीब 305 करोड़ 32 लाख रुपये की साइबर ठगी सामने आई। इन तीनों आंकड़ों को जोड़ने पर 1,55,424 शिकायतें और 1,402 करोड़ 22 लाख रुपये की ठगी सामने आती है।

नए बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर

साइबर ठगी का तरीका भी लगातार बदल रहा है। नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक, ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने के लिए म्यूल बैंक खातों समेत नए-नए खातों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे मामलों में दूसरे लोगों के दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते या फर्म तैयार कर उन्हें संदिग्ध रकम के लेन-देन के लिए इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आए हैं।

मध्यप्रदेश पुलिस भी साइबर अपराध में म्यूल अकाउंट, फर्जी प्रोफाइल, फर्जी सिम और ऑनलाइन फ्रॉड जैसे तरीकों को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। पुलिस के मुताबिक, साइबर धोखाधड़ी के मामलों में शुरुआती सूचना मिलने पर कार्रवाई के जरिए रकम को होल्ड कराने के प्रयास किए जाते हैं और इसके लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है।

फर्जी KYC और बैंक अधिकारी बनकर ठगी

साइबर अपराधी लोगों को फर्जी KYC अपडेट, बैंक अधिकारी बनकर फोन, संदिग्ध लिंक, फर्जी ऐप और दूसरे डिजिटल तरीकों से निशाना बना सकते हैं। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे बिना देरी 1930 पर शिकायत करनी चाहिए, ताकि संबंधित एजेंसियों के स्तर पर समय रहते कार्रवाई शुरू की जा सके।

डिजिटल बैंकिंग ने सुविधा बढ़ाई है, लेकिन साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता और जागरूकता सबसे जरूरी है।

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