जबलपुर: हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल ने दहेज और वैवाहिक क्रूरता के खिलाफ पति कार्तिक तिवारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही को खारिज करने से इंकार कर दिया। एकलपीठ ने सास किरण तिवारी और ससुर अशोक तिवारी को राहत प्रदान करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया।
भोपाल के महिला थाना जहांगीराबाद में धारा 498 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 तहत दर्ज एफआईआर व अपराधिक कार्यवाही को निरस्त किये जाने की पति तथा सास-ससुर की तरफ से अलग-अलग याचिका दायर करते हुए हाईकोर्ट की शरण ली गयी थी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से दायर दलील में कहा गया था कि पत्नी ने वैवाहिक घर छोड़ने के कई महीने बाद एफआईआर दर्ज कराई है। तलाक का आवेदन दायर करने के बाद एफआईआर दर्ज करवाई गयी है।
एकलपीठ ने तर्क को अस्वीकार करते हुए अपने आदेश में कहा है कि पति के द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 10 के तहत कार्यवाही शुरू करने के कारण आपराधिक कार्यवाही को रद्द नहीं किया जा सकता। एफआईआर में पति के खिलाफ दहेज की मांग और प्रताड़ना के विशिष्ट आरोप मौजूद हैं। ससुर अशोक तिवारी और सास किरण तिवारी के खिलाफ एफआईआर और बयानों में विशिष्ट आरोप नहीं हैं। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और व्यापक प्रकृति के पाए गए।
