सेवा तीर्थ के चिंतन शिविर में कई मंत्रियों के कार्यकलापों से असंतुष्ट रहे प्रधानमंत्री

प्रवेश कुमार मिश्र नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित सेवा तीर्थ में केन्द्रीय मंत्रियों के साथ मैराथन मंथन किया गया. सूत्रों की मानें तो इस दो दिवसीय चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य सरकार के कामकाज की समीक्षा करना, मंत्रियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों का रोडमैप तैयार करना था, लेकिन इस बैठक में कामकाज के आधार पर मोदी ने कई मंत्रियों की जबरदस्त क्लास भी लगाई है.

बताया जा रहा है कि यह बैठक वास्तव में सरकार के कामकाज की एक बेहद सख्त और गहन समीक्षा साबित हुई. बैठक में शामिल सभी कैबिनेट मंत्रियों को अपने-अपने मंत्रालयों का स्व-विश्लेषित रिपोर्ट कार्ड पेश करने का निर्देश दिया गया था. इस शिविर को अत्यधिक परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए बैठक में शामिल पूरे केंद्रीय मंत्रिपरिषद को 14-14 मंत्रियों के आठ मुख्य समूहों में विभाजित किया गया था. इन सभी समूहों की कमान वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों जैसे पीयूष गोयल, शिवराजसिंह चौहान,मनसुख मांडविया जैसे वरिष्ठों को सौंपी गई थी. इन समूहों में एक-दूसरे से जुड़े मंत्रालयों के मंत्रियों को एक साथ रखा गया था ताकि वे न सिर्फ आपसी तालमेल को बेहतर कर सकें, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं पर भी खुलकर अपनी बात रख सकें.

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंथन सत्र के दौरान प्रत्येक समूह की टेबल पर जाकर प्रेजेंटेशन का बारीकी से अवलोकन किया और मंत्रियों के कामकाज पर सीधे सवाल-जवाब किए. रिपोर्ट कार्ड तैयार करने और इस मंथन शिविर के एजेंडे को व्यवस्थित करने में कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग ने बहुस्तरीय माध्यमों का इस्तेमाल किया था.

इस चिंतन शिविर के दौरान मंत्रियों को प्रभावी गवर्नेंस, प्रशासनिक सुधार, पारदर्शी जनसंवाद और कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के व्यावहारिक गुर सिखाए गए. इसमें मुख्य ध्यान विशेष रूप से महिला और युवा केंद्रित नीतियों तथा विकसित भारत 2047 के विजन को गति देने पर केंद्रित रहा.माना जा रहा है कि इस कड़े और जमीनी मूल्यांकन के आधार पर ही आने वाले समय में मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जाएगा.

सूत्रों की मानें तो इस चिंतन शिविर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबसे कड़े सवाल शिक्षा, युवा मामलों के मंत्रालय, कौशल विकास व रोजगार, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सामाजिक कल्याण विभाग से जुड़े मंत्रियों से किए. शिक्षा व युवा मामलों से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जुड़े नीतिगत विवादों, युवाओं के बीच असंतोष और जेन-जी के साथ संवाद की भारी कमी को लेकर सवाल उठाए. मंत्रियों से दो-टूक पूछा गया कि युवाओं की समस्याओं को लेकर उनके पास क्या ठोस रणनीति है और युवा वर्ग में रोजगार व करियर को लेकर जो असंतोष देखा जा रहा है, उसे दूर करने के लिए संबंधित विभागों ने अब तक धरातल पर क्या काम किया है. इसके साथ ही सामाजिक कल्याण, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचा से जुड़े मंत्रियों से योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी और अंतर-मंत्रालयी समन्वय की कमी को लेकर कड़े सवाल पूछे गए.

सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री ने साफ संकेत दिया कि केवल कागजों या प्रेजेंटेशन पर योजनाएं दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और युवा केंद्रित नीतियों का लाभ सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के ठोस और कारगर प्रयास करना होगा. बताया जा रहा है कि समीक्षा सत्र में मंत्रालयों के बीच आपसी तालमेल न होने के कारण कई बड़े प्रोजेक्ट्स और विधायी सुधारों जैसे प्रमुख संविधान संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाने में आ रही अड़चनों के संदर्भ में भी सवाल जवाब किया गया. सूत्रों की मानें तो जिन विभागों के मंत्री इस रिपोर्ट कार्ड सत्र में संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके हैं और जिनकी जनसंवाद क्षमता कमजोर पाई गई है, आने वाले संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल में उनकी जिम्मेदारियों में कटौती या फेरबदल में बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है.

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