सागर। लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड मे दर्ज मुनि श्री शुद्धात्म सागर महाराज के द्वारा पत्तों पर उकेरे चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन कटरा नमक मंडी स्थित गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर मे किया जा रहा है। वर्षाकालीन चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री विभव सागर महाराज के संघस्थ मुनि श्री शुद्धात्म सागर महाराज द्वारा सुई और रेजर पत्ती के माध्यम से पत्तों पर प्रकृति, धर्म और आत्मा को चित्रित गया है। आचार्य श्री के साथ विहार के दौरान जंगल मे गिरे पत्तों पर मुनिश्री ने जैन धर्म के महामंत्र का लेखन किया। लेखन के बाद पत्तों पर सुई और रेजर पत्ती के माध्यम से प्रकृति से सृजन तक को उकेरा। जो कि साधना और सृजन का संगम है। एक ओर पर्णकला मे धर्म तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। चित्रों के माध्यम से प्रकृति, धर्म और आत्मा के संगम को साकार किया है। पर्णकला मे मुनिश्री ने आत्मदर्शन गुरू परम्परा को उकेरा गया तो रिश्तों,विश्वास की डोर को भी प्रस्तुत किया है। पीपल के पत्तों पर प्रकृति की गोद मे भारत का चित्रण किया तो सीमा पर डटे राष्ट्र प्रहरी सैनिकों को भी उकेरा गया। प्रदर्शनी के संयोजक सुनील जैन पडवार ने बताया कि 22 सितंबर से मंदिर मे प्रारंभ पर्णकला प्रदर्शनी कल 26 सितंबर शनिवार तक श्रृद्धालुओं के अवलोकनार्थ रहेगी। अभी तक एक हज़ार से अधिक श्रृद्धालु प्रदर्शनी देख चुके है। पिछले वर्ष 24 अक्टूबर 2025 को लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड मे मुनिश्री द्वारा पत्तों पर उकेरे चित्र को दर्ज किया गया है।
