
जबलपुर। छिंदवाड़ा सिरप कांड में हुई 26 बच्चो के मौत के मामले में आरोपी डॉ प्रवीण सोनी को हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए पीड़ित परिवार के अभिभावक को अनावेदक बनाने के निर्देश जारी किये। जिसके बाद याचिकाकर्ता की तरफ से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
डॉ प्रवीण सोनी की तरफ से दायर की गयी जमानत याचिका में कहा गया था कि जहरीले कफ सिरप के निर्माण में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। डॉक्टर होने के नाते उन्होंने अभिभावकों की सहमति से बच्चो का उपचार करते हुए दवा लिखी थी। याचिका में विगत एक साल से न्यायिक अभिरक्षा में होने का हवाला भी दिया गया था।
याचिका के सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि डॉक्टर होने के बावजूद भी प्रकरण में उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। डॉक्टर होने के कारण वह मरीज को अंतिम क्षण तक बचाने की कोशिश करना उनका दायित्व है। उनका ऐसा कभी इरादा नहीं था कि कफ सिरप से बच्चों की मौत हो जाये। इसके अलावा याचिका में अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किये जाने को भी चुनौती दी गयी थी।
