नयी दिल्ली, 24 सितंबर (वार्ता) केंद्र सरकार के कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डेयर) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अपने देशव्यापी संस्थानों और शाखाओं के साथ मिलकर ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के अंतर्गत स्वच्छता, साफ-सफाई और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए कई विशेष पहल शुरू की हैं। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों और विशेष रूप से स्कूली बच्चों को स्वच्छता तथा पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत, डीएआरई-आईसीएआर और पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित इसके संस्थानों ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों में व्यापक स्वच्छता गतिविधियां संचालित की हैं। आईसीएआर-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (एटीएआरआई), गुवाहाटी के विशेषज्ञों की एक टीम ने सिक्किम में छात्रों को स्वच्छता और टिकाऊ कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया। इसके अंतर्गत छात्रों को उत्तरी सिक्किम के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) का दौरा कराया गया, जहां उन्हें जैविक कचरे को उपयोगी खाद में बदलने की प्रक्रिया (वर्मीकम्पोस्टिंग) और वैज्ञानिक सफाई पद्धतियों की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
इसी श्रृंखला में, मेघालय स्थित ‘आईसीएआर रिसर्च कॉम्प्लेक्स फॉर नॉर्थ ईस्टर्न हिल रीजन’ के तहत कृषि विज्ञान केंद्र (री भोई) ने आसपास के गांवों और सार्वजनिक सड़कों के किनारे स्वच्छता अभियान चलाया। इस अभियान में संस्थान के कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों ने संयुक्त रूप से भाग लेकर स्वच्छ पर्यावरण के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
इन जमीनी प्रयासों के माध्यम से डीएआरई-आईसीएआर का नेटवर्क स्वच्छता के संदेश को संस्थागत सीमाओं से आगे बढ़ाकर छात्रों, स्थानीय समुदायों और नागरिकों को ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान में सक्रिय रूप से जोड़ रहा है, जिससे स्वच्छता को स्थायी पर्यावरण संरक्षण प्रथाओं से जोड़ा जा सके।
