
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (वार्ता) रणनीतिक और नयी उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की इकाइयों के अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) प्रयासों को प्रोत्साहित करने की सरकार की नीति के तहत विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने नये किस्म की इमेजिंग सुविधाओं वाले उपग्रहों की तकनीक विकसित करने के लिए बेंगलुरु की फर्म गैलैक्सआई स्पेस सोल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड को 63.83 करोड़ रुपये की मदद देने का समझौता किया है। मंत्रालय की गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह सहायता विभाग के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष योजना के तहत दी जा रही है। यह परियोजना कुल 247.69 करोड़ रुपये की है।
कुल मंजूर लागत वाले इस परियोजना का मकसद एक ऐसा मल्टी-सेंसर सैटेलाइट बनाना है जो हाई-रिज़ॉल्यूशन ( बाधे मीटर से छोटे) ऑप्टोएसएआर (सिंथेटिक अपर्चर राडार) वाली अधिक स्पष्ट तस्वीरें खींच सके। इस टेक्नोलॉजी को प्रौद्योगिकी के छठे और नौवें स्तर की तैयारी के स्तर पर ले जाना है। गैलेक्सीआई का मुख्य काम ऑप्टोएसएआर है, जो अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के दो बिल्कुल अलग तरीकों – सिंथेटिक अपर्चर रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (ईओ) इमेजिंग – को एक साथ लाता है।
टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “गैलेक्सीआई के साथ हुआ यह समझौता उभरती हुई स्पेस टेक्नोलॉजी में स्वदेशी क्षमताओं को सक्षम करने और उनके व्यावसायीकरण की दिशा में उनके सफ़र को सपोर्ट करने पर टीडीपी के फोकस को दिखाता है।”
गैलेक्सीआई के प्रमोटरों ने कहा, “टीडीबी से मिलने वाली सहायता हमें अपनी ऑप्टोएसएआर टेक्नोलॉजी के विकास और सत्यापन में तेज़ी लाने में मदद करेगी। एसएआरऔर ऑप्टिकल सेंसिंग को मिलाकर, हम पृथ्वी-अवलोकन की ऐसी क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं जो मौसम और रोशनी की अलग-अलग स्थितियों में हाई-रिज़ॉल्यूशन जानकारी दे सके। यह साझेदारी टेक्नोलॉजी को टीआरएल-9 तक ले जाने और उसके बाद उसे लागू करने में महत्वपूर्ण होगी।”
