रीवा :मध्यप्रदेश में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है।बालाघाट जिले के बिरसा और दमोह क्षेत्र में बीएमओ के पद पर रहकर डॉक्टर सुनील सिंह की नौकरी करने वाले युवक की तलाश में जुटी पुलिस को रीवा के बड़ागांव से अहम जानकारी मिली है। पुलिस की पतासाजी के दौरान सामने आया कि सुनील सिंह के नाम से तलाशा जा रहा व्यक्ति वास्तव में शिवकुमार पिता रामलखन पांडेय है, जो रीवा जिले के बड़ागांव का निवासी है।
बिरसा थाने में अपराध क्रमांक 258/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) में दर्ज मामले में सुनील सिंह की तलाश की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के दस्तावेजों और आधार कार्ड में दर्ज पतों के आधार पर संभावित स्थानों पर तलाश की गई। लोगों से पूछताछ के बावजूद उसका पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस ने उसकी चल-अचल संपत्ति की जानकारी जुटाने के लिए तहसील कार्यालय गुढ़ और तहसील हुजूर, रीवा को पत्र लिखे हैं।
मोबाइल नंबर से मिला बड़ागांव का सुराग, खुटेही में मिले बेटा-बेटी, बड़ागांव वाले मकान में लगा मिला ताला 11 से 13 अक्टूबर के बीच की गई पतासाजी में पुलिस को मोबाइल नंबरों की ग्राहक जानकारी के आधार पर रीवा जिले के बड़ागांव का पता मिला।वहां पहुंचकर पुलिस ने ग्रामीणों से पूछताछ की और सुनील सिंह का फोटो दिखाया। ग्रामीणों ने फोटो देखकर उसकी पहचान शिवकुमार पांडेय, पिता स्व. रामलखन पांडेय, निवासी बड़ागांव के रूप में बताई।
ग्रामीणों के मुताबिक, शिवकुमार पांडेय बालाघाट में डॉक्टर के रूप में काम करते हैं और गांव में उनकी जमीन व मकान है। वे पांच-छह महीने में गांव आते हैं।पुलिस ने बड़ागांव स्थित मकान पर तलाश की, लेकिन वहां ताला लगा मिला। ग्रामीणों ने बताया कि शिवकुमार पांडेय का नया मकान रीवा के खुटेही में है। इसके बाद पुलिस खुटेही स्थित मकान नंबर 12/789 पहुंची। वहां उसके बेटे आदर्श उर्फ शिवम पांडेय और बेटी अपर्णा पांडेय मिले। पुलिस के अनुसार, दोनों ने शिवकुमार पांडेय को अपना पिता बताया और कहा कि वे बालाघाट में डॉक्टर हैं, लेकिन उस समय घर पर नहीं थे।
