न्यूयॉर्क (अमेरिका), संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरानी नागरिक खुद अमेरिकी नीतियों और आतंकवाद का गंभीर शिकार बन रहे हैं। अमेरिका के साथ लंबे समय से चल रहे संघर्ष और तनाव पर बोलते हुए राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने जोर देकर कहा कि “जंग के मैदान से कभी भी स्थायी शांति हासिल नहीं की जा सकती।” इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वॉशिंगटन उस महान देश की असलियत को अब तक नहीं समझ पाया है, जिस पर वह लगातार धौंस जमाने की कोशिश कर रहा है।
इजराइल पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का गंभीर आरोप, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी नौसैनिक आवाजाही का किया समर्थन
अपने संबोधन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने इजराइल पर मध्य पूर्व क्षेत्र में आतंकवाद और भारी अस्थिरता फैलाने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पिछले दो सौ से अधिक वर्षों में कभी भी किसी भी देश पर पहले हमला नहीं किया है, बल्कि वह हमेशा अपनी संप्रभुता की रक्षा करता आया है। इसके अलावा, खाड़ी देशों के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर पेजेश्कियान ने चेतावनी दी कि ईरान किसी भी सूरत में अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) का इस्तेमाल करके ईरानी जहाजों और नौसैनिक गतिविधियों की आवाजाही को बाधित नहीं करने देगा। उन्होंने फिलिस्तीनी मुद्दों के समाधान तक अन्याय के खिलाफ ‘प्रतिरोध’ जारी रखने के अपने संकल्प को भी दोहराया।
मंच से हमलों के पीड़ितों की तस्वीरें दिखाकर खींचा वैश्विक ध्यान, संघर्ष में मारे गए बेगुनाहों का उठाया मुद्दा
भाषण के अंत में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दुनिया भर के मंच का उपयोग करते हुए संघर्ष और हमलों के पीड़ितों के दर्द को उजागर किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के इस प्रतिष्ठित मंच से मिनाब स्कूल और अन्य इलाकों में हुए हमलों के पीड़ितों, मासूम बच्चों तथा नागरिकों की तस्वीरें और कब्रों के दृश्य दिखाए। इन मार्मिक तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने दुनिया का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि कैसे आम नागरिक इस भू-राजनीतिक संघर्ष की कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र में शांति बहाली और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आह्वान किया।

