सतना :जीआरपी और आरपीएफ अमले की निगरानी के बावजूद सक्रिय कुछ चोर ट्रेनों में यात्रियों का कीमती सामान चुराने से बाज नहीं आते हैं. वहीं घटना सामने आने पर जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल भी खड़े होने लगते हैं. इसी कड़ी में संदेह के आधार पर पकड़े गए एक युवक से कोई सामान तो बरामद नहीं हुआ, लेकिन उसे ट्रेन के डिब्बे में ले जाकर यह जानने का प्रयास जरुर किया गया कि चोरियों को अंजाम कैसे दिया जाता है.प्लेटफार्म पर तैनाती के दौरान कुछ जीआरपी जवानों को एक युवक संदिग्ध अवस्था में खड़ा नजर आया.
जैसे ही पुलिस उसके पास पहुंची वह सकपकाने लगा. जिसके चलते संदेह के आधार पर उसे पकडक़र जीआरपी उप थाने ले आया गया. जहां पर उससे विधिवत पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान जीआरपी के सामने यह तो स्पष्ट हो गया कि पकड़ा गया युवक ट्रेन में चोरी करने वाले किसी गिरोह से जुड़ा हुआ है. लेकिन न तो उसके पास से चोरी का कोई सामान बरामद हुआ और न ही किसी वारदात में उसकी सीधी संलिप्तता ही सामने आ सकी. लिहाजा उसके विरुद्ध कार्रवाई करने का कोई ठोस आधार नजर नहीं आया. लेकिन पुलिस यह जरुर जानना चाह रही थी कि ट्रेनों में सक्रिय गिरोह चोरी की घटनाओं को अंजाम कैसे देते हैं. जिसके चलते जीआरपी द्वारा उक्त युवक को प्लेफार्म पर खड़ी एक ट्रेन में ले जाया गया. जहां पर उसे चोरी का डेमो दिखाने को कहा गया.
मिली चौंकाने वाली जानकारी
जीआरपी ने जब संदेही युवक से ट्रेन में चोरी के संबंध में सीन रिक्रियेट करने को कहा गया तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई. युवक ने जीआरपी को बताया कि चोर अक्सर ट्रेन के दो डिब्बों के बीच की जगह को सामान ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं. दोनों डिब्बों के बीच लगी चादरों को खोलकर अथवा दोनों डिब्बों से चिपके रबर-प्लास्टिक के पर्दे को काटकर सामान नीचे फेंक दिया जाता है. जिसके बाद चैन पुलिंग कर चोर ट्रेन से कूद जाते हैं. लिहाजा जब तक यात्री को सामान चोरी होने की भनक लगती है तब तक वह सामान ट्रेन से बाहर जा चुका होता है.
