नयी दिल्ली, 23 सितंबर (वार्ता) केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिकों की 8.67 लाख से अधिक फोन कॉल का जवाब दिया है, जो एक अनवरत प्रक्रिया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल डिफेंस इसे लागू करने पर नज़र रखता है। इसे वित्तीय वर्ष 2021 से 21 सितंबर तक जानकारी, दिशा-निर्देश, भावनात्मक समर्थन और फील्ड इंटरवेंशन को कवर करते हुए 8.67 लाख से ज़्यादा एक्शनेबल कॉल का जवाब दिया है, जो एक लगातार चलने वाला प्रक्रिया है।
राष्ट्रीय हेल्पलाइन एल्डरलाइन 14567 के ज़रिए जानकारी, दिशा- निर्देश, भावनात्मक समर्थन और मदद दे रहा है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन अटल वयो अभ्युदय योजना का एक हिस्सा है।
मंत्रालय में वरिष्ठ नागरिक डिवीज़न के संयुक्त सचिव सजीश कुमार एन ने इसको लेकर कहा कि एल्डरलाइन 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चालू है। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन पर 29 लाख से ज़्यादा कॉल आ चुकी हैं।
संयुक्त सचिव ने कहा कि एल्डरलाइन कॉल करने वालों को उनकी ज़रूरतों के हिसाब से मदद से जोड़ता है, जबकि स्टेट कनेक्ट सेंटर जानकारी और गाइडेंस देते हैं, इमोशनल सपोर्ट और काउंसलिंग देते हैं और जहां भी ज़रूरत होती है, फील्ड इंटरवेंशन को कोऑर्डिनेट करते हैं।
उन्होंने कहा कि शिकायत के नेचर के आधार पर, वे स्टेट सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट, पुलिस, हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशन, लीगल एड सर्विस, सीनियर सिटीजन होम और दूसरी लोकल एजेंसियों के साथ काम करते हैं और राज्य सरकारें जहां भी ज़रूरत होती है, क्षेत्र स्तर पर हस्तक्षेप और पुनर्वास में मदद करती हैं।
संयुक्त सचिव ने कहा कि मंत्रालय, हिस्सा लेने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों और सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ एग्रीमेंट के ज़रिए हेल्पलाइन को लागू करती है।
श्री सजीश कुमार एन ने कहा कि हेल्पलाइन और संबंधित सरकारें समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट के ज़रिए कॉल, सर्विस, शिकायतों और फील्ड में होने वाले कामों को मॉनिटर करती हैं।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्थन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल सर्विस डिलीवरी, अवेयरनेस एक्टिविटीज़, आउटरीच, एक्सेसिबिलिटी और लोकल अथॉरिटीज़ के साथ कोऑर्डिनेशन का भी रिव्यू करती है।
गौरतलब है कि मदद चाहने वाले वरिष्ठ नागरिक टॉल फ्री एल्डरलाइन नंबर 14567 पर कॉल कर सकते हैं। हेल्पलाइन सर्विस और रेफरल को कोऑर्डिनेट करती है। यह कॉल करने वालों को सीधे वित्तीय मदद नहीं देती है।
