नयी दिल्ली, 23 सितंबर (वार्ता) दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने बुधवार को चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का निष्पक्ष एजेंसी से ऑडिट कराने की मांग की।
श्री यादव ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता के बजाय दिल्ली को वीआईपी और झुग्गी-झोपड़ी, जे.जे. क्लस्टर और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले आम नागरिकों के रूप में बांटा जा रहा है। दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.6 लाख नाम हटाये गये हैं और इनमें 31.6 लाख लोगों को विसंगतियां दूर करने के नोटिस दिये गये हैं। मतदाताओं के माता-पिता की उम्र में अंतर, नाम की स्पेलिंग और पते में अंतर जैसी त्रुटियों के आधार पर नोटिस जारी किये गये हैं। प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या अनधिकृत कॉलोनियों और जे.जे. क्लस्टरों के निवासियों की है।
उन्होंने विसंगतियां दूर करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 14,947 में से 14,896 बूथों पर दो प्रतिशत से अधिक विसंगतियां बतायी गयी हैं, जबकि दिल्ली में करीब 1,200 ईआरओ हैं। उन्होंने सवाल किया कि इतने कम समय में लाखों मामलों का सत्यापन कैसे संभव होगा।
दिल्ली कांग्रेस प्रभारी काजी निजामुद्दीन ने एसआईआर को राजनीतिक प्रक्रिया बताया और कहा कि इससे गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग प्रभावित हो रहा है। बूथ मैनेजमेंट कमेटी और लीगल विभाग ने भी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की।
