जबलपुर :जबलपुर कैंट क्षेत्र के भाजपा विधायक अशोक रोहाणी के खिलाफ मारपीट के आरोप में दायर परिवाद को एमपी-एमएलए कोर्ट ने निरस्त कर दिया। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट एमपी एमएलए कोर्ट डीपी सूत्रकार ने प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के परीक्षण के बाद कहा कि परिवादी के आरोपों में विधायक के घटनास्थल पर मौजूद होने अथवा उनके द्वारा मारपीट के लिए उकसाए जाने संबंधी कोई तथ्य सामने नहीं आया। केवल संदेह के आधार पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता। परिवादी जबलपुर निवासी निशांत शर्मा की ओर से दर्ज एफआइआर के आधार पर कैंट थाने में अपराध दर्ज किया गया था। बाद में विधायक अशोक रोहाणी सहित अन्य के विरुद्ध परिवाद प्रस्तुत किया गया। विधायक अशोक रोहाणी की ओर से अधिवक्ता संदेश दीक्षित ने पक्ष रखा।
अदालत ने आदेश में उल्लेख किया कि लिखित आवेदन में क्षेत्रीय विधायक के इशारे पर उनके गुंडों द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया था, जबकि पुलिस के समक्ष दिए गए कथनों में घटना को लेकर केवल विधायक के इशारे का संदेह व्यक्त किया गया। वहीं धारा 65-बी के प्रमाण पत्र में सुंदर अग्रवाल, संजय जैन, आशीष राव और छोटू सिंह पर मारपीट करने का उल्लेख है। स्वतंत्र गवाह हिमांशु पिल्ले ने भी चार-पांच लोगों द्वारा मारपीट किए जाने की बात कही, जबकि परिवादी ने 20-25 लोगों द्वारा हमला किए जाने का कथन किया।
अदालत ने कहा कि मूल प्रकरण में परिवादी के बयान के बाद धारा 319 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत अभियुक्त का नाम जोड़े जाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। लेकिन मौजूदा परिवाद में विधायक के घटना स्थल पर उपस्थित होने अथवा उनके द्वारा मारपीट के लिए प्रेरित किए जाने का कोई प्रत्यक्ष तथ्य नहीं है। स्वतंत्र गवाह के बयान में आरोपियों की संख्या को लेकर भी अंतर है। ऐसे में परिवाद में संज्ञान लिए जाने योग्य पर्याप्त तथ्य नहीं पाए गए। इसी आधार पर परिवाद निरस्त कर दिया गया।
यह था मामला –
परिवादी ने आरोप लगाया था कि कैंट क्षेत्र में मतदाता सूची से करीब 25 हजार नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर वह लंबे समय से सक्रिय था। 20 मार्च 2023 को सदर क्षेत्र में बैठक के बाद उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया था। इस घटना को विधायक अशोक रोहाणी से जोड़ते हुए परिवाद दायर किया गया था। अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर विधायक के विरुद्ध संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।
