
सागर। सागर के वेदांती परिसर में रावतपुरा सरकार के चातुर्मास समापन अनुष्ठान का आयोजन हुआ। सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक प्रारंभ हुआ। महाभिषेक के दौरान भगवान शिव की विधिवत आराधना की गई। सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के माध्यम से की गई सामूहिक शिव उपासना में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और समर्पण के साथ सहभागिता की। महाभिषेक का भाव केवल व्यक्तिगत आराधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समस्त विश्व के कल्याण, शांति, सद्भाव और मंगल की सामूहिक कामना से जुड़ा रहा।महाभिषेक के पश्चात प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इसमें सभी ने एक स्वर में समाज, राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना की। व्यक्तिगत मनोकामनाओं से ऊपर उठकर सामूहिक मंगल की भावना इस प्रार्थना सभा का प्रमुख भाव रही।इसके पश्चात श्री हनुमत लक्ष्यार्चना का आयोजन हुआ। भगवान श्री हनुमान की आराधना और लक्ष्यार्चना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अपनी श्रद्धा अर्पित की।
शिव आराधना से प्रारंभ होकर सामूहिक प्रार्थना और श्री हनुमत लक्ष्यार्चना तक चला यह धार्मिक क्रम रावतपुरा सरकार के चातुर्मास समापन अनुष्ठान का प्रमुख केंद्र रहा।सनातन परंपरा में चातुर्मास साधना, संयम, स्वाध्याय, भक्ति और आत्मचिंतन का विशेष काल माना जाता है। इसी भावना के साथ रावतपुरा सरकार के चातुर्मास के दौरान सागर में अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ।हर शनिवार रावतपुरा सरकार लोगों के बीच पहुंचे और घर-घर जाकर गौ माता के लिए एक रोटी देने का आग्रह किया।यह अभियान केवल गौ सेवा का संदेश देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को यह सरल भाव समझाने का माध्यम बना कि सेवा के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। अपने घर की रसोई से निकली एक रोटी भी गौ सेवा का माध्यम बन सकती है। देवशयनी एकादशी से प्रारंभ चातुर्मास के दौरान सागर में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठानों का क्रम भी चलता रहा।
पूजन, जप, साधना, कथा और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को सनातन परंपरा और आध्यात्मिक संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया गया। प्रत्येक अनुष्ठान ने चातुर्मास की साधना को एक अलग आयाम दिया।
