वाशिंगटन, 21 सितंबर (वार्ता) अमेरिकी सेना ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सैन्य हस्तक्षेप की अपील के बाद यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले की तैयारी कर ली थी। अमेरिकी कमांडरों ने लक्ष्यों की सूची तैयार कर ली थी और हमले के लिए चुने गए लड़ाकू विमानों पर बम भी लादे जा रहे थे, लेकिन पहली कार्रवाई शुरू होने से ठीक पहले श्री ट्रंप ने हमला रोक दिया। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों की तैयारियां पहले की जानकारी से कहीं आगे बढ़ चुकी थीं। कमांडरों ने लक्ष्यों की सूची को मंजूरी दे दी थी और सैनिक हमले के लिए विमानों को तैयार कर रहे थे। अभियान शुरू होने के करीब पहुंचने के बाद ट्रंप ने इसे रोकने या कम से कम कुछ समय के लिए टालने का फैसला किया।
अखबार के अनुसार, यह फैसला प्रशासन के भीतर कई सप्ताह से चल रही इस बहस के बीच आया कि अमेरिका को हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की लड़ाई में सीधे शामिल होना चाहिए या नहीं। श्री ट्रंप शुरू में हमले की मंजूरी देने के इच्छुक नहीं थे। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ बातचीत के बाद उनका रुख बदला, हालांकि रविवार तक उन्होंने एक बार फिर अपना फैसला बदल दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल हमले नहीं किए जाएंगे, लेकिन भविष्य में सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
यह घटनाक्रम सऊदी अरब के साथ संबंधों और पश्चिम एशिया में एक और सैन्य मोर्चा खोलने के जोखिम के बीच अमेरिका के सामने मौजूद चुनौती को दिखाता है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह चिंता भी जताई है कि लंबे समय तक चलने वाले एक और हवाई अभियान से अमेरिकी सेना और हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। हूती यमन के लंबे समय से जारी संघर्ष में शामिल रहे हैं और पहले लाल सागर में जहाजों को निशाना बना चुके हैं। अमेरिका ने भी 2025 में हूती ठिकानों के खिलाफ व्यापक हवाई अभियान चलाया था। ताजा फैसले के बाद फिलहाल अमेरिका हूती ठिकानों पर सीधे हमले में सऊदी अरब के साथ शामिल नहीं होगा। दोनों देशों के सुरक्षा संबंध अब भी बरकरार हैं और क्षेत्रीय संघर्ष में भी सक्रिय है।
अमेरिका अब तक हूतियों पर सीधे हमले से बचता रहा है और इसके बजाय सऊदी अरब को खुफिया जानकारी तथा लक्ष्यों की पहचान से जुड़ी सहायता देता रहा है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान कई बार राष्ट्रपति श्री ट्रंप से बातचीत कर अमेरिकी हमलों की मांग कर चुके हैं, लेकिन इससे अब तक सीधे अमेरिकी सैन्य अभियान की शुरुआत नहीं हुई है।
हूतियों की गतिविधियां बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के कारण भी महत्वपूर्ण हैं। यह संकरा समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यहां बड़े पैमाने पर किसी भी तरह की बाधा से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
हूतियों ने सऊदी की राजधानी रियाद में उन ठिकानों और यानबू में अरामको की एक सुविधा पर हमले का भी दावा किया है, जिन्हें उन्होंने संवेदनशील स्थल बताया। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पूरी तरह पुष्टि नहीं हो सकी है।
अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार, श्री ट्रंप ने यह भी कहा है कि हूतियों ने वाशिंगटन से संपर्क किया है और संकेत दिया है कि वे अमेरिका के साथ सीधे टकराव नहीं चाहते। उनके रुख से सऊदी अरब के सामने स्थिति जटिल हो गई है, जो अमेरिकी मदद मांगने के साथ-साथ हूती बढ़त को खुद रोकने की कोशिश कर रहा है।

