नयी दिल्ली, 21 सितंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सोमवार को शीर्ष न्यायालय से तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की, जिसमें उन्होंने प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवाद के दौरान भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न पर रोक लगाने के फैसले को चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध करते हुए चुनाव आयोग के उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसमें आयोग ने अपनी अधिसूचना की प्रक्रिया के बीच ही पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक लगा दी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि दोनों पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे और आश्वासन दिया कि मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा। सुश्री बनर्जी की याचिका में चुनाव आयोग के 18 सितंबर के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश में ‘चुनाव चिह्न 1968’ के आदेश के तहत अंतिम निर्णय होने तक दोनों गुटों को ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। चुनाव आयोग ने आगामी छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। सुश्री बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है, जबकि रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है।

