युद्ध से तबाह गाजा में करीब तीन साल बाद बच्चों ने फिर शुरू की स्कूल की पढ़ाई

गाजा, 20 सितंबर (वार्ता) फिलिस्तीन की गाजा पट्टी में बच्चों ने करीब तीन साल के युद्ध के बाद शनिवार को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत की। बच्चे क्षतिग्रस्त स्कूलों, अस्थायी शिक्षण केंद्रों और तंबुओं में पढ़ाई के लिए पहुंचे। इस दौरान स्कूलों में डेस्क, किताबों और स्टेशनरी की कमी के साथ शिक्षा के बुनियादी ढांचे को हुए व्यापक नुकसान की तस्वीर भी सामने आई।

मध्य गाजा के नुसेरात शरणार्थी शिविर में अभिभावक अपने बच्चों को संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) द्वारा संचालित एक स्कूल में लेकर पहुंचे। यहां बच्चे सुबह की सभा के लिए कतार में खड़े हुए। पर्याप्त डेस्क नहीं होने के कारण कुछ बच्चों को कक्षा के फर्श पर बैठकर पढ़ना पड़ा।

यूएनआरडब्ल्यूए की शिक्षिका राजा अल-नबाहिन ने कहा कि स्कूलों के दोबारा खुलने के बावजूद बुनियादी शैक्षणिक सामग्री की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा, “युद्ध के बाद आज हमारे पास कई ऐसी चीजें नहीं हैं, जो उपलब्ध होनी चाहिए थीं। हमारे पास डेस्क, स्टेशनरी और किताबें होनी चाहिए। युद्ध के कारण बच्चों की पढ़ाई में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए इन सामानों की तत्काल जरूरत है।”

संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) के अनुसार, गाजा में नए शैक्षणिक सत्र के लिए पूरी पट्टी में 359 अस्थायी शिक्षण केंद्र तैयार किए गए हैं। कई परिवारों के लिए स्कूल लौटना केवल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए एक नया अनुभव भी है, जिन्होंने अपने शुरुआती वर्षों का बड़ा हिस्सा युद्ध के बीच बिताया है।

नुसेरात में अपने बच्चे को स्कूल लेकर पहुंचीं उम अली हुमैदाह ने कहा, “हमारे बच्चे आज सुबह बहुत जल्दी उठ गए। उन्हें पता ही नहीं है कि स्कूल क्या होता है, सुबह की सभा क्या होती है या सामान्य जीवन कैसा होता है। उन्होंने केवल बमबारी और युद्ध देखा है।”

उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने के समय उनका बेटा तीन साल का था और अब छह साल का होकर पहली कक्षा में जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम उसे पढ़ाई के लिए निजी शिक्षक के पास भेजते थे, लेकिन स्कूल की शिक्षा की जगह कुछ नहीं ले सकता।”

गाजा शहर में बच्चे यूनिसेफ की मदद से तंबुओं में बनाए गए शिक्षण केंद्रों में पहुंचे। इन केंद्रों में बच्चे सुबह की सभा के लिए कतार में खड़े हुए और फिर तंबुओं में बनाए गए अस्थायी कक्षाओं में पढ़ाई की।

यूनिसेफ के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में उसने गाजा में 173 शिक्षण केंद्रों के माध्यम से 2.65 लाख से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई। इन केंद्रों में बच्चों की पढ़ाई, मानसिक-सामाजिक कल्याण और दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष सेवाओं तक पहुंच में मदद की गई।

यूनिसेफ ने शिक्षा व्यवस्था में काम कर रहे 6,306 अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को भी सहायता दी है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई के दौरान पोषण के लिए उच्च ऊर्जा वाले बिस्कुट दिए जा रहे हैं, जबकि जल, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य से जुड़े सहयोगी संगठन पीने का पानी, स्वच्छता किट और लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय उपलब्ध करा रहे हैं।

छात्र मोहम्मद हाशिम ने कहा कि आर्थिक कठिनाइयों और विस्थापन के कारण बच्चों के लिए स्कूल लौटना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, “हम मुश्किल परिस्थितियों में रह रहे हैं। स्कूल बैग महंगे हैं, हमारे घर तबाह हो गए हैं और हम अभी तंबुओं में रह रहे हैं। स्कूल भी सामान्य इमारत के बजाय तंबुओं में बदल गया है।”

शिक्षा व्यवस्था को हुए नुकसान का असर स्कूल जाने वाले रास्तों और कक्षाओं में भी दिखाई देता है। कुछ बच्चे टिन की चादरों से बनाए गए अस्थायी ढांचों में पढ़ रहे हैं, जबकि उन स्थानों के आसपास मलबा पड़ा है, जहां कभी स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थान हुआ करते थे।

छात्र अहमद अल-गुल ने कहा, “युद्ध से पहले सड़कें अच्छी थीं, लेकिन अब वे पूरी तरह मलबे में बदल गई हैं। स्कूल में एक पुस्तकालय था, जहां से मैं किताबें ले सकता था और चित्र बना सकता था।”

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत बच्चों को नियमित पढ़ाई की ओर लौटाने की कोशिश है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सुरक्षित शिक्षण स्थानों और शैक्षणिक सामग्री की कमी तथा स्कूलों को हुए व्यापक नुकसान के कारण गाजा में पूरी औपचारिक शिक्षा व्यवस्था को बहाल करना अभी भी लंबे समय की चुनौती है।

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