भोपाल। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने उज्जैन में युवा धर्म संसद को संबोधित करते हुए धर्म को लेकर एक बयान दिया है, जिस पर अब सियासी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भागवत ने कहा कि धर्म सिर्फ पूजा-पाठ या धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है।
कचरा न करना और ट्रैफिक नियमों का पालन भी धर्म
धर्म केवल पूजा या धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि हम खाते हैं, लेकिन कचरा नहीं करते, यह भी धर्म है। ट्रैफिक के नियमों का पालन करते हुए चलते हैं, यह भी धर्म है।
अपनी उपासना-पद्धति, जो प्रकृति, गुरु या परंपरा से मिली है, उसका सम्मान करना चाहिए और दूसरों की उपासना का भी उतना ही सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी उपासना का सम्मान करते हुए दूसरों की उपासना का सम्मान करना और किसी को कन्वर्ट नहीं करना भी धर्म का हिस्सा है।
भागवत के इस बयान पर गैर-भाजपा दलों के नेताओं ने सवाल उठाए हैं और इसे अलग-अलग नजरिए से देखा है।
अब सवाल यही है कि क्या ट्रैफिक नियमों का पालन या सार्वजनिक जगहों पर सफाई रखना भी धार्मिक आचरण की श्रेणी में आता है?
मोहन भागवत के बयान पर राजनीतिक बहस जारी है।
