संयुक्त राष्ट्र, 19 सितंबर (वार्ता) जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 63वें सत्र के दौरान मानवाधिकार कार्यकर्ता खलीलुर रहमान ने पाकिस्तान में शिया और अहमदिया समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा पर गहरी चिंता जतायी है। श्री रहमान ने परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि इन दोनों समुदायों के साथ हो रहे व्यवहार से जुड़ी चिंताएं मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद दो, चार एवं 18 के तहत पाकिस्तान के दायित्वों से संबंधित हैं, जो समानता, गैर-भेदभाव और विचार, अंतरात्मा तथा धर्म की स्वतंत्रता की बात करते हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय या जातीय, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र का भी हवाला दिया और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए धार्मिक स्वतंत्रता तथा समान कानूनी संरक्षण पर चिंताओं का जिक्र किया। अपने आरोपों के समर्थन में श्री रहमान ने कराची में ईद के जश्न के दौरान हुए हिंसक हमलों तथा कराची और लाहौर सहित प्रमुख शहरों में अहमदिया समुदाय के उपासना स्थलों को सील करने या जबरन बंद कराने की रिपोर्टों का हवाला दिया। उन्होंने मानवाधिकार परिषद और उसकी संबंधित प्रणालियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि सभी धार्मिक समुदायों के सदस्यों को कानून के तहत समान संरक्षण मिले तथा उन्हें हिंसा, डराने-धमकाने और मनमानी हिरासत से सुरक्षा प्रदान की जाए। यह वक्तव्य जेनेवा में सात सितंबर से सात अक्टूबर तक आयोजित किये जा रहे मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के कार्यसूची विषय तीन के तहत सामान्य चर्चा के दौरान दिया गया।

