डायल के अनुसार, इन सुधारों से रनवे की कार्यक्षमता बढ़ाने, विमानों की आवाजाही को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने, रनवे पर विमानों के रहने का समय कम करने और अलग-अलग मौसम की परिस्थितियों में परिचालन की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी। परियोजना के दौरान डायल ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी), विमानन कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम किया। सभी निर्धारित सुरक्षा, परिचालन और नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 20 सितंबर से रनवे पर परिचालन दोबारा शुरू करने की मंजूरी मिली है।
डायल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप पाणिकर ने कहा कि रनवे 11आर/29एल को दोबारा चालू किया जाना दिल्ली हवाईअड्डे के भविष्य के लिए तैयार विमानन बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया जाना सुरक्षा, परिचालन उत्कृष्टता और यात्रियों को बेहतर सेवा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उन्नत रनवे के साथ नयी रैपिड एग्जिट टैक्सीवे तथा बेहतर नेविगेशन और लाइटिंग प्रणालियां दिल्ली हवाईअड्डे की क्षमता और मजबूती को और बढ़ाएंगी तथा देश में बढ़ती विमानन जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगी।
डायल ने कहा कि दोबारा चालू होने वाली रनवे दिल्ली हवाईअड्डे की परिचालन दक्षता और भविष्य में बढ़ने वाले हवाई यातायात को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा वैश्विक विमानन सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के मानकों के अनुरूप परिचालन सुनिश्चित करने में मदद करेगी। यह रनवे 2008 में शुरू की गयी थी और पिछले 17 वर्षों से लगातार परिचालन में थी। इस दौरान इसका नियमित रखरखाव किया गया तथा 2017 में इसका मामूली पुनर्वास भी किया गया था।

