अमेरिका, डेनमार्क, ग्रीनलैंड के बीच ‘स्थायी’ सुरक्षा समझौता, ग्रीनलैंड में बढ़ेगी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी

वाशिंगटन, 19 सितंबर (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका को “स्थायी सुरक्षा नियंत्रण” मिलेगा, वहां उसकी सैन्य मौजूदगी बढ़ेगी और गैर-नाटो देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा स्थापित करने या सैनिक तैनात करने से रोका जाएगा। श्री ट्रंप ने शुक्रवार को समझौते की घोषणा करते हुए इसे ‘इनफिनिट लाइफ’ व्यवस्था बताया और कहा कि इससे ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान होगा।

श्री ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है, जो ग्रीनलैंड में सुरक्षा और अन्य सभी जरूरतों पर अमेरिका को स्थायी नियंत्रण देता है और हमारी सभी प्रमुख अमेरिकी चिंताओं का पूरी तरह समाधान करता है। अमेरिका पर इसका कोई खर्च नहीं आएगा।” उन्होंने कहा कि समझौते के तहत अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों को भी वाशिंगटन की मंजूरी के बिना ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकाना स्थापित करने, सैन्य मौजूदगी रखने या संवेदनशील निवेश करने से रोका जाएगा।

श्री ट्रंप ने कहा, “अब से कोई भी अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी ग्रीनलैंड में कभी भी अड्डा नहीं बना सकता, सैन्य मौजूदगी नहीं रख सकता या हमारी स्पष्ट लिखित मंजूरी के बिना संवेदनशील निवेश नहीं कर सकता।” उन्होंने कहा कि अमेरिका “तुरंत” ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम शुरू करेगा और अर्ध-स्वायत्त दानिश क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर वहां विकास और निर्माण कार्य करेगा। श्री ट्रंप ने कहा, “हम डेनमार्क और ग्रीनलैंड के शानदार लोगों के साथ इस बड़े और बेहद रणनीतिक भूभाग के संबंध में शानदार भविष्य की दिशा में काम करने को उत्सुक हैं।” उन्होंने कहा, “हम इसकी पूरी तरह सुरक्षा करेंगे।”

डेनमार्क के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारें अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक में सुरक्षा मजबूत करने संबंधी समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर सकती हैं।

समझौते के लागू होने से पहले संबंधित संसदीय प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। समझौते का पूरा पाठ अभी जारी नहीं किया गया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक में सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय के अधिकार को बरकरार रखा जाएगा।

सुश्री फ्रेडरिक्सन ने कहा, “मुझे खुशी है कि हम ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य और अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता करने जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि समझौते से क्षेत्र में साझा सुरक्षा मजबूत होगी और यह “नाटो तथा यूरोप के लिए भी अच्छा” होगा। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि समझौता “डेनमार्क साम्राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता तथा ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देता है।”

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने भी प्रस्तावित समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “यह उत्साहजनक है कि हम ऐसा समझौता करने जा रहे हैं, जो ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य, अमेरिका और पश्चिमी गठबंधन की सुरक्षा सुनिश्चित और मजबूत करेगा।”

उन्होंने कहा कि समझौता “ग्रीनलैंड के हितों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में हमारी जगह” को मान्यता देता है तथा “हम सभी के हित में” है। समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में स्थायी पहुंच, सैन्य अड्डे स्थापित करने और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल के अधिकार मिलेंगे तथा गैर-नाटो देशों को द्वीप पर सैन्य मौजूदगी स्थापित करने से रोका जाएगा।

समझौते के तहत कोई भी गैर-नाटो देश ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा नहीं बना सकेगा और न ही वहां सैनिकों की मौजूदगी रख सकेगा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, समझौता यह भी सुनिश्चित करेगा कि ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिका के रणनीतिक रक्षा क्षेत्र का हिस्सा बना रहे। श्री ट्रंप ने समझौते को ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर अमेरिका को ”स्थायी नियंत्रण” देने वाला बताया है, लेकिन प्रस्तावित समझौते के तहत क्षेत्र की संप्रभुता अमेरिका को हस्तांतरित नहीं होगी। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने स्पष्ट किया है कि समझौता डेनमार्क साम्राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता तथा ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देता है।

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