यह अभियान पूरे आर्कटिक क्षेत्र में रक्षा मिशनों के लिए अमेरिकी और कनाडाई नोराड बलों को एक साथ लाता है। इसके तहत नोराड कर्मी और विमान डेनमार्क व अन्य नाटो सहयोगियों की सेनाओं के साथ विषम परिस्थितियों में काम करने के लिए ग्रीनलैंड में अग्रिम मोर्चे पर तैनात होंगे। यह तैनाती नोराड और अमेरिकी उत्तरी कमान की ‘नॉर्डिक ब्रिज’ अवधारणा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नाटो सहयोगियों, क्षेत्रीय भागीदारों और अन्य अमेरिकी सैन्य कमानों के साथ आर्कटिक अभियानों, अभ्यासों, प्रशिक्षण और निवेश का समन्वय करना है।
अलास्का नोराड क्षेत्र के कमांडर वायु सेना लेफ्टिनेंट जनरल रॉबर्ट डी. डेविस ने कहा, “ऑपरेशन आर्कटिक वांगार्ड यह साबित करता है कि विषम परिस्थितियां और विशाल दूरियां नोराड की सामूहिक रक्षा के लिए कोई बाधा नहीं हैं।” श्री डेविस ने कहा कि अलास्का से कनाडा होते हुए ग्रीनलैंड तक लड़ाकू विमानों की यह तैनाती कनाडा, डेनमार्क और अन्य नाटो सहयोगियों के साथ तालमेल को मजबूत करेगी, वहीं कठिन आर्कटिक स्थितियों में काम करने की सेना की क्षमता का परीक्षण भी करेगी।
उन्होंने कहा, “हम मिलकर उत्तरी अमेरिका के उत्तरी मार्गों पर निरंतर निगरानी और विश्वसनीय निवारक क्षमता बनाये रखते हैं।”
ऑपरेशन आर्कटिक वांगार्ड पूरे उत्तरी अमेरिकी आर्कटिक क्षेत्र में नोराड और अमेरिकी उत्तरी कमान की गतिविधियों की नियमित चलने वाली शृंखला का हिस्सा है। इन अभ्यासों को आर्कटिक के अग्रिम स्थानों में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने और उत्तरी अमेरिका के उत्तरी रास्तों की रक्षा को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। नॉर्डिक ब्रिज अवधारणा के तहत, इस नवीनतम अभियान में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में अधिक निरंतर मौजूदगी स्थापित करने के उद्देश्य से आर्कटिक के कई क्षेत्रों और स्थानों में काम करने वाली बहुराष्ट्रीय सेनाएं भी शामिल होंगी।

