प्रौद्योगिकी से लैस होकर समुद्री चुनौतियों के लिए तैयार रहे तटरक्षक बल: संजय सेठ

नयी दिल्ली 17 सितंबर (वार्ता) रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भारतीय तटरक्षक बल से तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी के साथ कदम मिलाते हुए उभरती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।

श्री सेठ ने गुरुवार को यहां तीन दिन के 43वें भारतीय तटरक्षक कमांडर सम्मेलन के पहले दिन अपने संबोधन में कहा कि तटरक्षक बल को नयी प्रौद्योगिकी का केवल इस्तेमाल ही नहीं करना चाहिए बल्कि उनके विकास में सहयोगी भी बनना चाहिए। उन्होंने तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि और तटरक्षक कमांडरों के साथ राष्ट्रीय और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की।

रक्षा राज्य मंत्री ने समुद्री हितों की रक्षा, तटीय सुरक्षा और समुद्र में संकट के समय त्वरित मदद के लिए तटरक्षक बल की सराहना की। उन्होंने कहा कि समुद्र में संकट के समय तटरक्षक बल राष्ट्रीयता की परवाह किये बिना लोगों की जान बचाने में पहली प्रतिक्रिया देने वाली एजेंसी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में नेटवर्क, सेंसर, सॉफ्टवेयर, डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर क्षमता और अंतरिक्ष आधारित तकनीकों का महत्व बढ़ रहा है। उन्होंने तटरक्षक बल से स्टार्ट-अप, उद्योग, डीआरडीओ और शोध संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।

श्री सेठ ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि इसका मतलब केवल भारतीय सामान खरीदना नहीं है, बल्कि भारतीय चुनौतियों के लिए समाधान विकसित करना और ऐसी क्षमताएं तैयार करना है, जो वैश्विक जरूरतों को पूरा कर सकें। उन्होंने इसे ‘मेक इन इंडिया, मेक ऑफ वर्ल्ड’ की सोच से जोड़ा। उन्होंने मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में तटरक्षक बल की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा के लिए विकसित क्षमताएं खोज और बचाव, चिकित्सा निकासी, आपदा प्रतिक्रिया और समुद्री प्रदूषण नियंत्रण में भी उपयोगी हैं।

श्री सेठ ने सरकार के ‘महासागर’ दृष्टिकोण के अनुरूप तटवर्ती क्षेत्रों से खुले समुद्र तक भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने उन्नत प्लेटफॉर्म, पानी के भीतर इस्तेमाल होने वाली तकनीक, मानवरहित प्रणालियों, लंबे समय तक निगरानी करने की क्षमता, उपग्रह आधारित समुद्री क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षित संचार की जरूरत बतायी।

सम्मेलन के दौरान तटरक्षक कमांडर, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एनएस राजा सुब्रमणि और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन के साथ भी चर्चा करेंगे। इन चर्चाओं का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा के सभी क्षेत्रों में तीनों सेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।

सम्मेलन में पिछले एक साल की तटरक्षक बल की परिचालन तैयारियों, सामग्री और रसद सहायता, मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण तथा प्रशासनिक पहलों की समीक्षा की जा रही है। कमांडर समुद्री सुरक्षा की बदलती चुनौतियों के बीच जरूरी कदमों की पहचान करेंगे। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए स्वदेशी क्षमता बढ़ाने से जुड़ी परियोजनाओं की भी समीक्षा की जायेगी।

 

 

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