एनजीटी की तल्ख टिप्पणी: सरकारी जमीन किसी की पैतृक संपत्ति नहीं, अधिकारियों की भी तय हो जवाबदेही

भोपाल। भोज वेटलैंड और शहर के जल निकायों में अतिक्रमण व अवैध निर्माण के मामले में एनजीटी सख्त हो गया है. इसके लिए दो दिन चली तालाबों में एफटीएल की सीमा में निर्माणों पर ठोस कदम उठाने पर जोर दे रहा है. वहीं एनजीटी ने शासकीय भूमि की सुरक्षा को लेकर सख्त टिप्पणी की है. एनजीटी ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में केवल अतिक्रमणकारी पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है. यह भी देखा जाना चाहिए कि कब्जा होने तक संबंधित अधिकारी और प्रशासनिक तंत्र ने क्या किया. अधिकारियों की निष्क्रियता या लापरवाही से यदि अतिक्रमण या अवैध निर्माण हुआ है तो उनकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए. एनजीटी ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन किसी व्यक्ति या अधिकारी की पैतृक संपत्ति नहीं है. यह टिप्पणी बुधवार को बड़े तालाब में अतिक्रमण को लेकर राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर भोपाल एवं अन्य की सुनवाई के दौरान की गई.

-एफटीएल की सीमा होगी तय, फिर सामने आएगा अतिक्रमण

एनजीटी ने भोज वेटलैंड और जल निकायों की वास्तविक सीमा स्पष्ट करने पर जोर दिया है. इसके लिए फुल टैंक लेवल के आधार पर सीमांकन किए जाने की जरूरत बताई गई है. बड़े तालाब में एफटीएल की सीमा निर्धारित होने के बाद प्रतिबंधित क्षेत्र तय हो सकेगा और निर्माण भी पता चल सकेंगे. एनजीटी के रिकॉर्ड में एफटीएल के आसपास 50 मीटर के नो-कंस्ट्रक्शन जोन में अनधिकृत निर्माण, मैरिज गार्डन, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और पक्की सडक़ों का भी उल्लेख है. एनजीटी ने वेटलैंड की पहचान, जमीनी सत्यापन और नक्शे पर भी जोर दिया है. इसके अलावा 2.25 हेक्टेयर से छोटे तालाब और जल संरचनाओं की पहचान और संरक्षण की जरूरत भी बताई गई है.

-5.46 लाख हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा

एनजीटी की सुनवाई में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा मार्च 2025 में प्रकाशित आंकड़ों का भी हवाला दिया गया. इनमें करीब 5,46,089.45 हेक्टेयर वन भूमि के अतिक्रमण की जानकारी सामने आई है. एनजीटी ने सार्वजनिक और पर्यावरणीय संपत्तियों को अतिक्रमण से बचाने के लिए सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई. एनजीटी ने कहा कि जल निकाय, तालाब और अन्य प्राकृतिक संसाधन जनता के हित में संरक्षित किए जाने चाहिए.

-6 अक्टूबर को एनजीटी में अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अंतरिम कार्रवाई रिपोर्ट पेश की गई. बोर्ड ने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा. अधिकरण ने अगली सुनवाई से पहले विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. दोनों मामलों की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होगी. मामले में आवेदक राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पैरवी की.

 

 

Next Post

अमानक बीज विक्रय पर 15 लाइसेंस धारियों के लाइसेंस निरस्त

Thu Sep 17 , 2026
सीधी : कृषि विभाग द्वारा किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं मानक बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में बीज विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों से नमूने लिए गए थे। प्रयोगशाला परीक्षण में निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए नमूनों के संबंध में संबंधित विक्रेताओं को बीज विक्रय पर प्रतिबंध लगाते हुए […]

You May Like