
वाशिंगटन, 16 सितंबर (स्पुतनिक/वार्ता) ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के कारण अमेरिका को एक अगस्त तक करीब 38.1 अरब अमेरिकी डॉलर (2,69,545 करोड़ रुपये) का भारी वित्तीय नुकसान हो चुका है। सैन्य अभियानों की तीव्रता के आधार पर आने वाले एक महीने की लड़ाई में अमेरिका को दो से तीन अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। इस का खुलासा अमेरिकी कांग्रेस के बजटीय कार्यालय (सीबीओ) की ताजा रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस युद्ध में सबसे बड़ा खर्च गोला-बारूद की पुन: आपूर्ति पर हुआ है। अमेरिका ने अब तक इस्तेमाल किये गये गोला-बारूद की जगह नये हथियार खरीदने पर लगभग 21.7 अरब डॉलर खर्च किये हैं। इसमें से केवल 13.1 अरब डॉलर उन मिसाइल-डिफेंस इंटरसेप्टर पर खर्च हुए हैं, जिनका उपयोग ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट करने के लिए किया गया था।
सीबीओ के अनुसार, जून 2025 से अब तक अमेरिका अपने मिसाइल-डिफेंस इंटरसेप्टर स्टॉक का करीब आधा से दो-तिहाई हिस्सा इस्तेमाल कर चुका है और ईरान युद्ध के कारण इस भंडार में भारी गिरावट आयी है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गयी है कि यदि हथियारों का उत्पादन बढ़ाया भी जाता है, तो भी इस भंडार को पहले जैसी स्थिति में लाने में कम से कम पांच वर्ष का समय लगेगा। ईरान ने अमेरिकी रक्षा उपकरणों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। संस्था के अनुसार, अमेरिका को युद्ध के मैदान में लगभग 1.9 अरब डॉलर के सैन्य उपकरणों का नुकसान हुआ है, जिसमें 50 करोड़ डॉलर का टर्मिनल हाई ऑल्टीट्यूड एरिया डिफेंस रडार सिस्टम, लड़ाकू विमान और ड्रोन शामिल हैं। इस संघर्ष का आर्थिक असर अब अमेरिकी नागरिकों पर भी पड़ रहा है। युद्ध के कारण कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे महंगाई में उछाल आया है। ईंधन की बढ़ी हुई लागत का असर अब धीरे-धीरे देश की पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है।
