
उज्जैन। महाकाल की नगरी में समय के साथ बढ़ती आबादी, श्रद्धालुओं की संख्या और धार्मिक आयोजनों का दबाव अब शहर के पुराने मार्गों को नए स्वरूप में ढालने की जरूरत पैदा कर रहा है। पटनी बाजार में वर्ष 1959 में हुए चौड़ीकरण के बाद अब करीब 67 साल बाद एक बार फिर इस मार्ग की तस्वीर बदलने की तैयारी है। शहर के कई ऐसे मार्ग हैं, जहां आजादी से पहले या आजादी के तत्काल बाद चौड़ीकरण हुआ था। इन मार्गों पर अब सिंहस्थ-2028 को देखते हुए दोबारा विकास की कवायद शुरू हो गई है।
महाकाल मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालु, साधु-संतों की पेशवाई, धार्मिक जुलूस, यात्राएं, पंचक्रोशी यात्रा और विभिन्न पर्वों पर उमडऩे वाली भीड़ को देखते हुए पुराने शहर के कई मार्गों का चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है। सिंहस्थ-2028 में करीब 50 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। ऐसे में महाकाल मंदिर से जुड़े प्रमुख मार्गों पर सुगम आवागमन और भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती होगी।
निशान लगे, नोटिस भी बांटे
जिन मार्गों पर दशकों पहले चौड़ीकरण हुआ था, वहां अब फिर से निशान लगाए गए हैं और प्रभावित निर्माणों को नोटिस दिए गए हैं। इनमें कई पुराने मकान, दुकानें और धर्मस्थल भी शामिल हैं। कहीं मंदिर का हिस्सा प्रभावित होगा तो कहीं मस्जिद अथवा अन्य धार्मिक स्थल चौड़ीकरण की जद में आएंगे। यही वजह है कि कई स्थानों पर भावनात्मक और धार्मिक मुद्दे भी सामने आए हैं। इसके बावजूद प्रशासन का प्रयास है कि सभी पक्षों से चर्चा कर विकास की राह आगे बढ़ाई जाए।
सिंहस्थ-2028 से पहले बचे हुए बड़े विकास कार्यों को पूरा करने के लिए प्रशासन पूरी ताकत के साथ जुटा है। वर्षों से जिन कार्यों की जरूरत महसूस की जा रही थी, वे अब तेजी से जमीन पर उतर रहे हैं। करीब दो वर्षों में उज्जैन के कई पुराने मार्ग, चौराहे और यातायात व्यवस्था नए स्वरूप में दिखाई देंगे। यह बदलाव आने वाली पीढिय़ों के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी लगातार तैयारियों में जुटे हैं। सिंहस्थ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उज्जैन के भविष्य को नई दिशा देने का अवसर है। इसलिए भावनाओं का सम्मान करते हुए, संवाद और सहमति के साथ विकास की राह पर आगे बढऩा ही महाकाल की नगरी के हित में होगा।
