
रीवा, पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान दस्तावेजों और आपराधिक रिकॉर्ड की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है, अन्यथा यह जेल की हवा खिला सकता है। ऐसा ही एक गंभीर मामला रीवा शहर से सामने आया है, जहां पासपोर्ट आवेदन के साथ जमा किए शपथ पत्र में झूठी जानकारी देने पर पुलिस ने एक आवेदक के खिलाफ धोखाधड़ी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की है।
दरअसल यह पूरा मामला रीवा शहर के सिटी कोतवाली थाने का है। थाना प्रभारी निशा मिश्रा के मुताबिक, रीवा शहर के पाण्डेन टोला निवासी भगवानदास लालवानी ने पासपोर्ट बनवाने के लिए 16 जुलाई को पासपोर्ट कार्यालय में अपना आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था।नियमानुसार, पासपोर्ट आवेदन के साथ कई जरूरी दस्तावेज और एक शपथ पत्र भी संलग्न किया गया था। इस शपथ पत्र में आवेदक भगवानदास ने लिखित रूप से यह दावा किया था कि उसके खिलाफ किसी भी थाने या न्यायालय में कोई भी आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध नहीं है और उसका रिकॉर्ड पूरी तरह साफ है।
इंधर पासपोर्ट कार्यालय द्वारा आवेदन की शुरुआती प्रक्रिया पूरी होने के बाद, आवेदक के चरित्र और दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के लिए फाइल संबंधित क्षेत्र के सिटी कोतवाली थाने भेजी गई। जब थाना प्रभारी और उनकी टीम ने भगवानदास लालवानी द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच की और पुलिस रिकॉर्ड खंगाला, तो शपथ पत्र में दी गई जानकारी पूरी तरह से गलत निकली।
जांच में यह पाया गया कि भगवानदास लालवानी के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं। लेकिन
आपराधिक इतिहास होने के बावजूद उसने जानबूझकर प्रशासन को गुमराह करने और पासपोर्ट हासिल करने के उद्देश्य से शपथ पत्र में खुद को बेदाग बताया था।
फिलहाल शासकीय दस्तावेजों में झूठी जानकारी देकर धोखाधड़ी करने और देश के नियमों का उल्लंघन करने पर रीवा पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने बताया कि पुलिस रिकॉर्ड में पुराना आपराधिक मामला सामने आने और शपथ पत्र में गलत जानकारी देने के कारण, पुलिस ने संबंधित आवेदक भगवानदास लालवानी के विरुद्ध पासपोर्ट अधिनियम की सुसंगत धाराओं और धोखाधड़ी के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
